कृषि विज्ञान केंद्र सोहना में पांच दिवसीय प्रशिक्षण का समापन, किसानों को दी गई वैज्ञानिक खेती की जानकारी
मृदा परीक्षण, जैव उर्वरक और फसल अवशेष प्रबंधन अपनाने पर दिया जोर
भारतभारी। कृषि विज्ञान केंद्र, सोहना में आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुक्रवार को समापन हुआ। कार्यक्रम में किसानों को खरीफ फसलों में संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने कहा कि वैज्ञानिक तरीके से खाद और उर्वरकों का प्रयोग करने से फसल उत्पादन बढ़ने के साथ मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहती है।
प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों को खरीफ फसलों में पोषक तत्व प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों से अवगत कराना था, जिससे उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ खेती की लागत को भी कम किया जा सके।
समापन अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार ने कहा कि मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक प्रबंधन, जैव उर्वरकों और जैविक स्रोतों के समन्वित उपयोग से फसलों की गुणवत्ता और उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने किसानों से संतुलित मात्रा में उर्वरकों के प्रयोग की अपील की।
प्रशिक्षण के दौरान ई. अशोक कुमार पांडेय ने कृषि यंत्रीकरण और संसाधनों के कुशल उपयोग, डॉ. शेष नारायण सिंह ने कृषि प्रसार और तकनीकी हस्तांतरण, डॉ. सर्वजीत बीज ने गुणवत्तापूर्ण बीज व बीज उपचार की जानकारी दी। वहीं, डॉ. प्रवेश कुमार (मृदा वैज्ञानिक) ने मृदा परीक्षण, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, सूक्ष्म पोषक तत्वों की आवश्यकता और मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के बारे में बताया।
इसके अलावा डॉ. प्रवीण कुमार मिश्र ने उद्यान फसलों में पोषक तत्व प्रबंधन, डॉ. सुनील सिंह ने पशुपालन और प्राकृतिक संसाधनों के समन्वित उपयोग, डॉ. मार्कंडेय सिंह और नीलम सिंह ने किसानों को अपने विषयों से जुड़ी वैज्ञानिक जानकारी दी।
प्रशिक्षण में किसानों को उर्वरकों के उचित समय और मात्रा में प्रयोग, जैव उर्वरक, हरी खाद, फसल अवशेष प्रबंधन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने किसानों की समस्याओं का समाधान करते हुए उन्हें वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में रामलगन, राम सागर, अर्जुन कुशवाहा, राजकुमार धर, रवि चौधरी, ज्वाला प्रसाद समेत कई किसानों ने प्रतिभाग किया।