शोहरतगढ़ में भाजपा प्रत्याशी बबिता कसौधन की जीत पर खुशी मनाते समर्थक।
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शोहरतगढ़। रिकॉर्ड मतदान वाली शोहरतगढ़ नगर पंचायत का परिणाम भी ऐतिहासिक रहा है। यहां से 726 वोटों से जीत दर्ज कर बबिता कसौधन ने हैट्रिक लगाई है। इससे पहले भी वह लगातार दो बार चेयरमैन निर्वाचित हुई हैं। खास बात यह कि बबिता ने यह जीत अनारक्षित सीट पर दर्ज की है। हर बार उनके जीत का अंतर भी बढ़ता ही गया।
बबिता कसौधन पहली बार वर्ष 2001 में चुनाव जीती थीं। तब वह निर्दल उम्मीदवार के रूप में चुनाव में शामिल हुई थी। दूसरी बार वर्ष 2006 में भाजपा के सिंबल पर मैदान में उतरीं। कड़े मुकाबले में उन्होंने 237 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। उनका मुकाबला निर्दल उम्मीदवार मनोज मित्तल से रहा। इस बार फिर भाजपा ने उन्हें प्रत्याशी बनाया। पार्टी के भरोसे पर खुद को खरा साबित करते हुए बबिता ने 726 वोटों से अंतर से बड़ी जीत दर्ज की है। उन्हें 2008 वोट प्राप्त हुए, जबकि निकटतम प्रतिद्वंद्वी पिंटू गौड़ को 1282 मत मिले। बबिता की यह जीत कई मायने में खास है।
वह शोहरतगढ़ नगर पंचायत की अकेली महिला उम्मीदवार थीं। मैदान में उतरे अन्य पुरुष प्रतिद्वंद्वियों को धूल चटाकर उन्होंने नारी शक्ति का परचम लहराया। यही नहीं, चुनाव मैदान में बबिता अपने ही लोगों का विरोध झेलने के बावजूद विजेता बनीं। भाजपा की सहयोगी अपना दल के सिंबल पर निर्वाचित विधायक अमर सिंह चौधरी इस सीट पर खुलकर बबिता के विरोध में थे। निर्दल उम्मीदवार के समर्थन में उन्होंने जनसंपर्क और जमकर प्रचार भी किया था।
बबिता की जीत की घोषणा के बाद समर्थक खुशी से झूम उठे। जमकर अबीर-गुलाल उड़ाए और जीत की खुशियां बांटी। वरिष्ठ समाजसेवी योगेंद्र प्रताप सिंह, हियुवा के देवीपाटन मंडल प्रभारी सुभाष गुप्ता, रमेश गुप्ता, धनुर्धर प्रताप सिंह, संजय कसौधन, शिवकुमार अग्रवाल, कृष्ण कुमार अग्रवाल, अजय सिंह, विष्णु गुप्ता आदि ने खुशी मनाई और बधाई दी।