सिद्धार्थनगर। गोरखपुर जनपद में बिजली के तार टूटने से हुए हादसे में एक युवक और दो मासूम की जान चली गई। इस तरह की घटना से यहां भी इन्कार नहीं किया जा सकता है। क्योंकि, शहर के ऐसे स्थानों पर जर्जर तारों का मकड़जाल है, जहां आवागमन होता है। तार टूटकर गिरने से यहां पर भी बड़ा हादसा हो सकता है।
जिले में तार टूटने के पहले भी हादसे हुए हैं। लेकिन, इन हादसों से विभागीय जिम्मेदार सबक नहीं ले रहे हैं। अगर घटना से सबक लेते तो शायद शहर में तार लटकते न मिलते हैं। सोमवार को नगर के मुख्य मार्ग की पड़ताल की गई तो बिजली निगम की व्यवस्था पर सवाल उठने वाली तस्वीरें सामने आईं।
जिले में शायद ही कोई माह हो जब विद्युत से कोई जख्मी में न हों और जान न जाए। इसमें विद्युत कर्मी के अलावा आम लोग भी शामिल हैं। होने वाले हादसे से भी विद्युत निगम सबक नहीं ले रहा है। गोरखपुर में बिजली के तार टूटने से हुई तीन की मौत ने जिले में पहले हुई घटनाओं को एकबार फिर ताजा कर दिया है। घटनाओं के बाद विद्युत निगम ने हादसा रोकने पर कितना काम किया है और जर्जर तार व पोल को हटाया गया है। इसकी हकीकत जानने के लिए नगर में पड़ताल की गई। इसमें कई स्थानों पर तार और पोल डैमेज पाए गए। स्थानीय लोगों से बात की गई तो उनकी ओर से बताया गया कि कई बार शिकायत की जा चुकी है। लेकिन विद्युत नगर के जिम्मेदारों ने अनसुना कर दिया है।े