मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए प्रशासन की ओर से की गई थी पूरी कोशिश
पिछले चुनाव के रिकॉर्ड को भी नहीं कर पाए
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। मतदान प्रतिशत बढ़ाने को लेकर चुनाव आयोग, प्रशासन और स्वंय सेवी संस्था की कोशिशों पर शनिवार को तब पानी फिर गया, जब पिछले वर्ष की तुलना में 0.28 फीसदी मतदान होने का आंकड़ा सामने आया है। 51.98 प्रतिशत ही मतदान का आंकड़ा छुआ। मतदान प्रतिशत के कम होने के पीछे जानकार मौसम और मतदाताओं विकास की बात को लेकर राजनैतिक दलों के प्रति बढ़ती हुई नाराजगी मुख्य वजह मान रहे हैं। उनका कहना है कि यह न होता तो प्रशासन जिस प्रकार से जागरूक करने का मुहिम छेड़ा था, मतदान प्रतिशत पिछले चुनावों की तुलना में जरूर बढ़ता।
मतदान प्रतिशत बढ़े इसके लिए प्रशासन की ओर से हर लोकसभा, विधानसभा चुनाव में पूरी कोशिश करता है। इसके लिए तमाम तरह के जागरूकता अभियान, रैली, सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से मतदाताओं को जागरूक करती है। जिससे मतदान प्रतिशत में इजाफा दिखे। लेकिन प्रशासन की सारी कोशिशों के बावजूद मतदान का कम होना कहीं न कहीं किसी स्तर पर कसर रह जाने का नतीजा है जो बूथों पर पहुंचने वाले मतदाताओं की संख्या में हर वर्ष कमी आ रही है। ऐसा शनिवार को जनपद में हुए मतदान में 0.28 प्रतिशत पिछले वर्ष की तुलना में मतदान होने पर जानकार चर्चा कर रहे हैं। वर्ष 2019 में 52.26 प्रतिशत, जबकि 2014 में 53.09 प्रतिशत मतदान रहा।
0.28 पिछले चुनाव की तुलना में वोटिंग कम होने के पीछे जानने की कोशिश की गई तो नगर निवासी वरिष्ठ नागरिक राजबहादुर जायसवाल ने कहा कि पिछले तीन बार से मतदान प्रतिशत कम हो रहा है। प्रशासन हर बार और अधिक जोश से यह प्रयास करता है कि मतदान प्रतिशत बढ़े। प्रशासन की ओर से इसमें कोई कसर नहीं छोड़ा जाता है। मतदाता सूची में नाम डलवाने से लेकर स्कूली बच्चों, बीएलओ, आशा वर्कर और अब तो सोशल मीडिया और रैली का भी सहारा ले रहा है। जैसा की इस बार देखा गया। प्रशासन के प्रयास में कसर नजर नहीं आ रही है। लेकिन मतदान प्रतिशत लगातार कम हो रहा है।
इस पर कहीं न कहीं राजनीति दलों को मथंन करने की जरूरत है। इसमें सबसे बड़ी वजह यह हैै कि पहले की तरह से नेता न तो जीत के बाद लोगों के बीच जाते हैं और न ही यह देखते हैं कि कहां किस काम की जरूरत है। कहां विकास होना चाहिए। यह इसलिए कहना पड़ रहा है कि कई स्थानों पर सड़क और अन्य सुविधाएं न होने के कारण मतदाताओं ने बहिष्कार किया। घंटों मतदान ठप रहा। प्रशासन को प्रयास करना पड़ा तब जाकर मतदान हुआ। क्या मतदान प्रतिशत बढ़ाने की जिम्मेदारी केवल प्रशासन की है। अगर मतदाता बूथों तक नहीं पहुंच रहे हैं, उनकी नाराजगी बाहर आ रही है तो राजनीतिक दलों को इसे गंभीरता से लेने की जरूरत है। वहीं, सूर्यप्रकाश ने कहा कि मतदान कम होने के पीछे कहीं न कहीं मौसम भी मुख्य वजह है। 44.1 डिग्री तापमान शनिवार को था। गर्मी भीषण थी,बूथों पर तो टेंंट आदि की व्यवस्था थी, लेकिन बूथ तक जाने में मतदाताओं को परेशान हो रही थी। इसी वजह से पुरुषों की तुलना में महिलाएं और बीमारी से परेशान लोग बाहर नहीं निकलें। अगर यही चुनाव फरवरी और मार्च माह के दूसरे सप्ताह में हो कई प्रतिशत मतदान बढ़ जाएगी। कहीं न कहीं मौसम बड़ी वजह है। हर वर्ष इसी भीषण गर्मी में मतदान होना बड़ा कारण है।