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Siddharthnagar News: जिले में बिगड़ी हवा की सेहत, एक्यूआई 160 के पार

Wed, 05 Jun 2024 03:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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सुबह में शहर के पास खेतो में छाया धुंध। संवाद
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जिले में बिगड़ी हवा की सेहत, एक्यूआई 160 के पार
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घर से बाहर निकले तो लगा लें मास्क, बारिश नहीं होने तक जहरीली रहेगी हवा
आग लगी की घटना और फसल अवशेष जलने से धुआं राख से वायुमंडल में घुल गया है जहर

धुंध की तरह वायुमंडल में घुल रहा प्रदूषण
तापमान अधिक होने से मिट्टी के कारण भी हवा में बन गए धूल का रूप

बोले विशेषज्ञ-आंख में जलन और राख से फेफड़ों में हो सकता इन्फेक्शन

संवाद न्यूज एजेंसी

सिद्धार्थनगर। जिले में अगलगी और डंठल के जलने से हवा की सेहत बिगड़ गई है। खेत की राख और धूल गुबार के कण वायुमंडल में परत बना गया है। जिससे हवा की गुणवत्ता खराब हो गई आंकड़ों के मुताबिक वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 160 पहुंच चुका है। विशेषज्ञ चिकित्सकों का कहना है कि हवा से जहां आंख में जलन होगी, वहीं सांस के रोगियों को धूल के कण से फेफड़े में संक्रमण का खतरा है। बारिश होने तक हवा की गुणवत्ता इसी प्रकार रहेगी। ऐसे में अगर बाहर निकलते हैं तो मास्क जरूर लगाएं। खास करके सांस के रोगी और बच्चों को लिए यह बेहद जरूरी है।
सांस और सीने में जकड़न और दर्द की शिकायत वाले मरीजों की संख्या माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के साथ ही निजी अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। चिकित्सक बुजुर्गों और बच्चों पर विशेष ध्यान देने की सलाह दे रहे हैं। क्योंकि इनके फेफड़े में संक्रमण तेजी से फैलने का खतरा अधिक रहता है। अप्रैल से लू के कारण जमीन सख्त हो गई है। जिससे धूल गुबार का रूप लेकर उड़ रही है। इसके साथ ही फसल की कटाई के बाद लोग डंठल में आग लगा दिए जो बचा है, वह भी जलकर नष्ट हो गई। खेत की राख और धुएं से जहां आंख में जलन हो रही है। वहीं, सांस लेने में भी तकलीफ बढ़ी है। तीन दिन पहले तक एक्यूआई का स्तर 145 से 150 के बीच था। जबकि रविवार को एक्यूआई का स्तर 160 दर्ज किया गया।
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चिकित्सक इसे सेहत के लिए नुकसानदेह बता रहे हैं। रविवार सुबह दृष्यता कम हो गई। आसमान में धुंध ही नजर आ रहा था। जिससे लोगों को परेशानी महसूस हो रही थी। भारी बारिश होने तक राख से वायुमंडल में धुंध जैसा छाया रहेगा। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज मेंं पिछले कई दिनों से सांस से संबंधित रोगियों की संख्या बढ़ गई है। सांस लेने में तकलीफ के साथ ही सीने और गले में जकड़न की शिकायत वाले 15-20 रोगी पहुंच रहे हैं। बार-बार घुटन जैसी स्थिति उत्पन्न हो जा रही है। मेडिसिन विभाग के डॉ. गौरव कुमार दुबे ने बताया कि मास्क लगाने और धूल गुबार वाले स्थाल पर जाने से बचने की सलाह दी जा रही है। साथ ही नियमित दवा लेने के लिए कहा जा रहा है।

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बोले विशेषज्ञ

वायु प्रदूषण व्यक्ति को बुरी तरह से बीमार करने की ताकत रखता है। मौजूदा समय में खेत का डंठल जलने से धुआं के साथ ही राख भी उड़ रहे हैं। इसके साथ ही निर्माण स्थल बाल और मोरंग का कण हवा में उड़ रहा है। राख और धूल व मोरंग का कण सबसे अधिक असर फेफड़ों पर पड़ता है। इसके अलावा आंखें, स्किन और दूसरे शरीर के दूसरे पार्ट्स भी वायु प्रदूषण के बुरे प्रभाव से जूझते हैं। फेफड़ों पर वायु प्रदूषण की समस्या बड़ी बन सकती है। उम्रदराज लोगों में अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और सीओपीडी का कारण बन सकता है। बढ़ती उम्र के साथ इम्युनिटी कमजोर पड़ जाती है और शरीर भी उतने अच्छे से काम नहीं कर पाती। सांस के ऐसे रोगी धूल भरी सड़क, निर्माण स्थल जहां धूल उड़ रहा हो, फसल की कटाई और मड़ाई में न जाएं। अगर निकलते हैं तो मास्क लगाकर निकलें। क्योंकि राख, धुआं, धूल से एक परत बन चुकी है जो धुंध के तरह से दिख रही है। बारिश होने तक यह समस्या बनी रहेगी। इसलिए मास्क लगाकर निकलें, चश्मा लगाते हैं तो नियमित लगाएं, इससे आंख में जलन नहीं होगी।

-डॉ. एसके राव, एमडी मेडिसिन

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बचपन से प्रदूषण में रहें बच्चे हों या कभी कभी प्रदूषित हवा में आने वाले बच्चे, सभी में सांस से जुड़ी परेशानियां होती है। इसमें अस्थमा, निमोनिया, लंग इरिटेशन और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज, सीओपीडी होने का खतरा रहता है। बच्चों को बाहर कम निकालें, अगर लेकर चलते हैं तो मास्क जरूर लगा दें। क्योंकि उनके फेपड़े में संक्रमण तेजी से फैलता है।

-डॉ. फजल खान, बालरोग विशेषज्ञ माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज

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प्रदूषण बहुत ही खराब होता है। यह स्वस्थ व्यक्ति का बीमारी बना देता है। मौजूदा समय में प्रदूषण बढ़ा है, क्योंकि डंठल जलने से उसकी राख उड़ रही है। प्रदूषण से नॉन एलर्जी, राइनाइटिस, साइनसाइटिस, नाक में खुजली, सांस लेने में तकलीफ और बार-बार छींक आना, गले में चिपका जैसा महसूस होने सहित छोटी बड़ी समस्याएं होती हैं। प्रदूषण से बचाव के लिए मास्क लगाना बेहद जरूरी है। अगर दिक्कत होती है तो तत्काल इलाज कराएं।
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-डॉ. संजय कुमार शर्मा, नाक, कान गला रोग विशेषज्ञ

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यहां से बिगड़ी हवा

मौजूदा में फसल की कटाई हो चुकी है। जिले में अगलगी की घटनाएं लगातार हो रही है। घर और झोपड़ी जलने के साथ ही खेत का डंठल तेजी से जलाई जा रही है। खेत की राख और धूल से धुंध बन गया है। इसके अलावा सड़क के किनारे गिरे बोलू, मोरंग और निर्माण स्थल से धूल उड़ रही है। जिसकी वजह से यह समस्या हो रही है। हवा की गुणवत्ता बिगड़ रही है।
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