संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। लोकमाता अहिल्याबाई भारतीय इतिहास की उन महान नारियों में से हैं। जिन्होंने नारी शक्ति, प्रशासनिक दक्षता और धर्म परायणता का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया जिसकी स्मृति आज भी भारतीय जनमानस में श्रद्धा के साथ अंकित है।
यह बातें प्रदेश के श्रम एवं सेवायोजन एवं जिले के प्रभारी मंत्री अनिल राजभर ने कहीं। वह मंगलवार को अहिल्याबाई होल्कर जन्म त्रिशताब्दी वर्ष स्मृति अभियान के तत्वावधान में लोहिया कला भवन में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि 31 मई 1725 को महाराष्ट्र के अहमद नगर स्थित चांड़ी ग्राम में उनका जन्म हुआ। वह विलक्ष्ण प्रतिभा और प्रखर बुद्धि की धनी थीं। उनके पिता मानकोजी शिंदे मराठा साम्राज्य में पाटिल के पद पर थे उन्होंने अपनी पुत्री को मर्यादा, नीति और धर्म का संस्कार बचपन से दिया। विवाह के उपरांत वह मालवा राज्य की बहू बनी और कालांतर में राज्य की महारानी बनीं। वह न केवल धर्मप्रेमी थीं बल्कि उत्कृष्ट शासक भी, वे सैनिक रणनीति में निपुण थीं।
सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में विकसित भारत में महिलाओं को बराबर का दर्जा मिला है। कश्मीर से कन्या कुमारी तक लोकमाता रानी अहिल्याबाई होल्कर जन्म त्रिशताब्दी वर्ष मनाया जा रहा है। किसानों को उनकी उपज के लिए उचित मूल्य दिलाने हेतु कर्जमाफी और बाजार व्यवस्था को सुदृढ़ किया।
इस दौरान कन्हैया पासवान, पूर्व मंत्री डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी, हरि चरण कुशवाहा, उपेंद्र प्रताप सिंह, लालजी त्रिपाठी, रामकुमार कुंवर, गोविंद माधव, शिवनाथ चौधरी, हरि शंकर सिंह, विपिन सिंह आदि उपस्थित रहे।ु