सिद्धार्थनगर। सहालग में पनीर से बनी सब्जियां और पकौड़े छककर खाने वाले लोग बीमार हो रहे हैं। इसकी वजह यह है कि कुछ चुनिंदा दुकानों में ही शुद्ध और महंगा पनीर मिला रहा है, जबकि ज्यादातर दुकानों में मिलावटी पनीर की बिक्री हो रही है।
जिले में दूध 60 रुपये लीटर है और पनीर 250 रुपये किलो तक मिल जा रहे हैं, जबकि एक किलो पनीर निकालने के लिए पांच से छह लीटर दूध लगता है। इससे पनीर की शुद्धता का अनुमान आसानी से लगाया जा सकता है। कारोबारियों के अनुसार जिले में औसतन प्रतिदिन लगभग 10 क्विंटल और सहालग में रोजाना लगभग 25 क्विंटल से अधिक पनीर की खपत होती है। जबकि सामान्य तौर पर भी पौष्टिक समझकर लोग पनीर खाते हैं, लेकिन शुद्धता की गारंटी नहीं है।
बाजार में बिक रहे दूध और दूध से बने पनीर व अन्य सामानों में मिलावट से सेहत बिगाड़ रही है। धंधेबाजों का अपना अलग नुस्खा है। दुकानों पर किस्म-किस्म की मिठाई, खोआ, पनीर, घी दिखने में ताजा तो हैं मगर, यह सेहत के लिए नुकसानदेह भी हैं। जब तक धंधेबाजों के इस गणित को समझेंगे तब तक काफी कुछ गंवा चुके होंगे। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम शहर से लेकर कस्बों तक दौड़ भाग भले ही तेज किए हुए हैं मगर, इन सामग्रियों की शुद्धता पर आंख मूंदकर भरोसा कतई न करिए। एक दुधिए के अनुसार जितनी मात्रा में पनीर बिक रहा है, उतने मात्रा में दूध का उत्पादन ही नहीं है।
एक लीटर शुद्ध दूध फाड़ने पर 160 से 170 ग्राम पनीर निकलता है। ऐसे में एक किलो पनीर तैयार करने में पांच से छह लीटर दूध की आवश्यकता होती है। ऐसे में छह लीटर दूध का दाम 360 रुपये होगा, जबकि दूध जलाने में ईंधन और समय भी लगता है। ऐसे में शुद्ध पनीर की कीमत 400 रुपये से कम नहीं होनी चाहिए। जब पावडर व अन्य सामान मिला दिया जाता है तो पनीर सस्ता मिल जाता है और आसानी से मिलावट पकड़ में भी नहीं आती है।