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उद्गम स्थल पर वास्तविक स्वरूप में दिखेगी आमी नदी

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उद्गम स्थल पर वास्तविक स्वरूप में दिखेगी आमी नदी
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आठ गांव के 5 हेक्टेयर 102 एअर जमीन को किया गया अधिग्रहण, मुआवजे को धन जारी
रबीन्द्र कुमार गुप्ता
डुमरियागंज। तहसील क्षेत्र से निकलकर पड़ोस के जनपद सहित तीन जनपदों में सैकड़ों हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचित करने वाली आमी नदी अब अपने उद्गम स्थल से ही अपने वास्तविक स्वरूप में दिखेगी। इस दिशा में समुचित बदलाव के लिए कवायद शुरू हो गई है। डुमरियागंज विधायक राघवेन्द्र प्रताप सिंह की पहल पर शासन की उच्चस्तरीय समिति ने इस बात की मंजूरी दे दी है। आमी नदी के उद्गम स्थल से करीब पौने तीन किलोमीटर तक नदी के रास्ते में पड़ने वाली किसानों की भूमि अधिगृहीत कर नदी को उसका वास्तविक स्वरूप वापस लौटाया जाएगा।
शासन के निर्देश पर स्थानीय तहसील प्रशासन भूमि अधिग्रहण की तैयारी में जुट गया है।
आमी नदी का इतिहास करीब पांच हजार साल पहले का माना जाता है। किंवदंती है कि नदी का आरंभ डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के ग्राम सिकहरा कोहड़ा से माना जाता है। यह नदी पड़ोस के संतकबीरनगर जनपद से होते हुए गोरखपुर जिले के सोहगौरा में पहुंचकर राप्ती नदी में विलीन होती है। नदी की कुल लंबाई 102 किलोमीटर है। ऐतिहासिक साक्ष्यों को समेटे यह जीवनदायिनी नदी अपनी पहचान खोती जा रही है।
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संतकबीरनगर से ही इसका पानी प्रदूषण की मार से इतना जहरीला हो जाता है कि जानवरों के पीने लायक भी नहीं रहता। मान्यता है कि इसी नदी को पार करके राजकुमार सिद्धार्थ ने अपने राजसी वस्त्र उतारकर ज्ञान की खोज प्रारंभ किए थे। बौद्ध धर्म के विस्तार की कवायद जब प्रारंभ हुई तो इसी नदी के किनारे सर्वप्रथम बौद्ध विहार बने। इसी नदी के तट पर गुरु गोरक्षनाथ व संत कबीर के बीच शास्त्रीय संवाद हुआ था। कबीर की रचनाओं में भी इस नदी का जिक्र मिलता है। सदियों की उपेक्षा के बाद अब इस नदी को उसका वास्तविक स्वरूप दिए जाने की कवायद तेज कर दी गई है। विधायक राघवेन्द्र प्रताप सिंह ने करीब डेढ़ साल पहले शासन को पत्र भेजकर आमी नदी के उद्गम स्थल को पर्यटन स्थल घोषित करने के साथ ही इसके जीर्णोद्धार की मांग की थी। इसके बाद शासन के निर्देश पर सिकहरा कोहड़ा से लेकर बढ़या भोलानाथ के बीच करीब चार किलोमीटर इस नदी की खुदाई किसानों से भूमि लेकर कराई जाएगी।
आमी के उद्गम स्थल को मिलेगी पर्यटकीय पहचान
विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि उन्होंने डेढ़ वर्ष पहले नदी के संबंध में प्रस्ताव दिया था। शासन स्तर पर एनजीटी व हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की कमेटी ने स्थलीय निरीक्षण कर रिपोर्ट दिया था जिसके आधार पर काम शुरू होगा। उद्गम स्थल से नदी की खुदाई तो होगी ही तटों पर पार्क व अन्य निर्माण कार्य पर्यटन विभाग कराएगा। पर्यटन सचिव स्तर से इसकी भी मंजूरी मिल चुकी है।
भूमि अधिग्रहण कार्य हो चुका है पूर्ण, जल्द होगा बैनामा
एसडीएम त्रिभुवन ने बताया कि शासन के निर्देश पर भूमि अधिग्रहण का कार्य पूर्ण करा लिया गया है। सिकहरा कोहड़ा से बढ़या भोलानाथ के बीच आठ गांव के करीब 579 किसानों की 5 हेक्टेयर 102 एअर जमीन अधिग्रहीत की गई है। किसानों से जमीन बैनामा लेने के लिए सिंचाई विभाग में शासन द्वारा धन भी जारी कर दिया गया है। सिंचाई विभाग के कर्मचारियों और लेखपालों की टीम बनाकर गांव में काश्तकारों से मिलकर उनका जमीन बैनामा कराने की प्रक्रिया जल्द शुरू करवा दी जाएगी।
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पार्क के साथ ही नदी में चलेगा स्टीमर
आमी नदी के उद्गम स्थल के तट पर पार्क विकसित होगा। इसके अलावा किनारे-किनारे सीढ़ी का भी निर्माण होगा। लोगों के मनोरंजन के लिए दो स्टीमर का भी इंतजाम किया जाएगा। पार्क की देखभाल के लिए वहां एक गार्ड रूम भी बनाया जाएगा। साथ ही आमी के नाम से एक विशाल गेट भी बनवाया जाएगा।
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