सिद्धार्थनगर। अब कैंसर से पीड़ित रोगियों को सामान्य जांच और थेरेपी और अन्य छोटी समस्याओं के लिए भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी। उन्हें मेडिकल कॉलेज में ही त्वरित इलाज मिलेगा। इसके लिए कॉलेज में डे केयर कैंसर सेंटर की स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसमें पांच बेड का वार्ड बनाया जाएगा, जहां वेंटीलेटर सहित अन्य प्रकार की सुविधाएं रहेंगी।
इस यूनिट के शुरू होने से उन मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी, जिनका नियमित इलाज लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान सहित अन्य बड़े संस्थानों में चल रहा है और जिन्हें सामान्य दिक्कत, इंजेक्शन या दवा के लिए बार-बार बाहर जाना पड़ता है। इतना ही नहीं, जरूरत पड़ने पर संबंधित डॉक्टर से बात करके उनका इलाज किया जाएगा। विभाग के जुड़े लोगों के मुताबिक इस सेवा के शुरू करने के पीछे का उद्देश्य है कि मरीजों को भाग-दौड़ से छुटकारा मिले और खर्च कम में उसे बेहतर इलाज मिल सके। साथ ही हायर सेंटरों पर भी मरीजों का बोझ कम हो सके।
जिले में हर साल युवा से लेकर वृद्ध से तक मुंह सहित अन्य प्रकार के कैंसर की बीमारी की गिरफ्त में आ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर इलाज के सुविधा न होने के कारण उन्हें कैंसर संस्थान के अलावा लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया संस्थान, एसजीपीआई सहित अन्य संस्थानों में इलाज के लिए भाग-दौड़ करनी पड़ती है। सामान्य समस्या होने या फिर रुटीन चेकअप के लिए बार-बार जाना पड़ता है। इसके लिए उन्हें और परिवार के लोगों को जहां शारीरिक और मानसिक रूप से परेशान होना पड़ता है। वहीं, आर्थिक रूप से भी परेशानी होती है, जिससे देखते ही देखते परिवार के लोग खर्च का बोझ उठाने में टूट जाते हैं।
शासन की ओर से मेडिकल कॉलेज में डे केयर कैंसर सेंटर वार्ड स्थापित करने के संबंध में निर्देश जारी हुए हैं। इस क्रम में सीएमओ की ओर से मेडिकल कॉलेज में यूनिट स्थापित किए जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मेडिकल कॉलेज परिसर में प्रस्तावित कैंसर केयर यूनिट 5 बेड की होगी। यहां एक नोडल डॉक्टर के साथ चार सदस्यीय प्रशिक्षित स्टाफ की तैनाती की जाएगी। यूनिट में कैंसर मरीजों को सामान्य इंजेक्शन, दवाएं, हल्की-फुल्की दिक्कत, कमजोरी, उल्टी, बुखार या कीमोथेरेपी के बाद होने वाली सामान्य परेशानियों के लिए भर्ती कर इलाज की सुविधा दी जाएगी, जांच की भी सुविधा रहेगी। गंभीर स्थिति होने पर संबंधित बड़े संस्थान के विशेषज्ञ डॉक्टरों से संपर्क कर मरीज की बीमारी की हिस्ट्री साझा की जाएगी और उनके परामर्श के अनुसार दवा दी जाएगी। इससे मरीज को तत्काल राहत मिल सकेगी और अनावश्यक रेफर करने की स्थिति कम होगी। यह सेंटर सीधे लखनऊ संस्थान से जुड़ा रहेगा और इलाज के लिए आने वाले मरीजों के इलाज में ओपीनियन लेंगे और उसी हिसाब से इलाज करेंगे।
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सीएमओ की मॉनिटरिंग में होगा संचालन
सूत्रों के अनुसार यह यूनिट मुख्य चिकित्सा अधिकारी की मॉनिटरिंग में संचालित होगी। मेडिकल कॉलेज प्रशासन की देखरेख में यहां आवश्यक दवाओं, इंजेक्शन और बुनियादी उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। जरूरत पड़ने पर मरीज को उच्च केंद्र के लिए रेफर भी किया जाएगा, लेकिन प्राथमिक उपचार जिले में ही देने का प्रयास रहेगा।
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ऐसे होगी यूनिट की कार्यप्रणाली
कैंसर मरीज का पूर्व इलाज जिस संस्थान में चल रहा है, उसकी पूरी हिस्ट्री दर्ज की जाएगी। मरीज को सामान्य परेशानी होने पर डे केयर यूनिट में दिखाया जाएगा। आवश्यक होने पर 24 से 48 घंटे तक ऑब्जर्वेशन में रखा जा सकेगा। संबंधित विशेषज्ञ से फोन या ऑनलाइन माध्यम से सलाह लेकर दवा दी जाएगी। गंभीर स्थिति होने पर तत्काल रेफर की व्यवस्था रहेगी।
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2023 में मिले थे 134 मरीज
प्रशासन के रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2023 में 499 गंभीर रोगियों को इलाज के लिए मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से इलाज के लिए सहायता के रूप में 7.28 करोड़ धनराशि दी गई है। इसमें कैंसर के मरीजों की संख्या 134 रही है। इसी प्रकार लगातार कैंसर से पीड़ित मरीज पाए जा रहे हैं। यह उस समय के रिकाॅर्ड हैं, अब संख्या और बढ़ गई होगी। यह तो सरकारी आंकड़े वाले थे, न जाने कितने लोग ऐसे हैं जो सीधे निजी अस्तालों में इलाज करवा रहे हैं।
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बोले विशेषज्ञ, यह है कैंसर के लक्षण
अगर कहीं मांस की गुठली में एकाएक वृद्धि होने लगे। दर्द के साथ ही खून आने लगे। खाने में परेशानी हो, जलन हो। गले में दर्द बना रहे, आवाज में भारीपन हो जाए। पानी निगला न जा रहा हो। घाव तीन सप्ताह से अधिक समय भर न रहा हो तो तत्काल चिकित्सक के पास जाएं। उनकी सलाह पर दवा लें और जांच कराएं। क्योंकि, यह कैंसर का लक्षण हो सकता है। इसमें लापरवाही घातक हो सकती है। क्योंकि इन लक्षणों से जुड़े मरीज हर माह कई मिल रहे हैं।
- डॉ. संजय कुमार शर्मा, नाक, कान गला रोग विशेषज्ञ
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बोले जिम्मेदार
मेडिकल कॉलेज में डे केयर कैंसर सेंटर स्थापित किया जाएगा। इसके लिए कागजी प्रक्रिया चल रही है। तैनात होने वाले कर्मियों को प्रशिक्षित किया गया है। जल्द ही वार्ड को शुरू किया जाएगा।
डॉ. आरके चौरसिया, सीएमओ