सिद्धार्थनगर। लंबे अरसे से जारी राइट टू रिजेक्ट की मांग को आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को हरी झंडी दे दी। अबकी लोकसभा चुनावों में लोगों को किसी प्रत्याशी को नकारने के लिए भी विकल्प मिलेगा। इस नए बटन को आम आदामी अपनी ताकत बता रहा है। फैसला आने के बाद अमर उजाला ने लोगों का मन टटोला तो कुछ ऐसी ही बाते सामने आईं।
वन विभाग कालोनी के पास रहने वाले राकेश कसौधन ने कहा कि लंबे समय से लोग इस बटन की जरूरत महसूस कर रहे थे। सुप्रीम कोर्ट ने इसे हरी झंडी देकर जन भावना का सम्मान किया है। इससे न सिर्फ आम आदमी को अपनी ताकत का अहसास होगा बल्कि राजनीति में गलत लोगों की भरमार पर भी लगाम लगेगा।
परसा निवासी शिक्षक सोनू पांडेय का कहना है कि राइट टू रिजेक्ट नेताओं के बीच जनता की ताकत का अहसास कराएगा। इसके आने के बाद लोगों को किसी नेता को नकारने का भी हक हासिल होगा। राजनीति के शुद्धिकरण के लिए इसकी जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
थरौली निवासी मनोज तिवारी का कहना है कि इस कानून से आम आदमी को अपनी ताकत का अहसास होगा। लोग अपने वोट की कीमत को समझेंगे। वो न सिर्फ अपने पसंद के उम्मीदार को मत दे सकेंगे बल्कि नापसंद को नकार भी सकेंगे। यह बदलाव असलियत में लोकतंत्र लाएगा।
नौगढ़ निवासी सिद्धार्थ अग्रवाल ने कहा कि राइट टू रिजेक्ट का हक हासिल होने से लोगों में मतदान को लेकर नया जोश देखने को मिलेगा। जो लोग इसलिए वोट देने नहीं जाते थे कि उनकी पसंद का कोई उम्मीदवार नहीं मैदान में है, अब वह भी वोट देने के लिए पोलिंग बूथ तक पहुंचेंगे।