अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। 17 दिन के नवजात की उपचार के दौरान हुई मौत के मामले में जांच टीम ने प्रथम दृष्टया चिकित्सक को दोषी माना है। पांच सदस्यीय टीम ने रिपोर्ट डीएम को सौंप दी है। संभावना है कि अब प्रशासन डीएम के निर्देश पर संबंधित अस्पताल व चिकित्सक पर कार्रवाई हो सकती है।
उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के जिलाध्यक्ष अनिल सिंह ने 27 नवंबर 2018 को उच्चाधिकारियों और सदर थाने में तहरीर देकर आरोप लगाया था उनकी पत्नी का प्रसव नौगढ़-गोरखपुर मार्ग पर एक चर्चित प्राइवेट अस्पताल में हुआ था। सामान्य प्रसव होने के बाद बच्चे का उपचार यही से चल रहा था। 18 नवंबर 2017 को बच्चे के सिर में फुंसी होने पर इसी अस्पताल के चिकित्सक के पास वे बच्चे को ले गए। सुधार नहीं हुआ तो 20 नवंबर को वे दोबारा चिकित्सक के पास गए तो डॉक्टर ने बिना जानकारी दिए ही बच्चे के सिर में चीरा लगा दिया। इसके बाद बच्चे की हालत बिगड़ने लगी तो चिकित्सक ने उन्होंने अन्यत्र उपचार के लिए कहा। गोरखपुर के एक अस्पताल में 22 नवंबर की रात बच्चे की मौत हो गई। यहां के चिकित्सक ने बताया था कि गलत इंजेक्शन से बच्चे के शरीर में इंफेक्शन हो गया था, जिससे उसकी मौत हो गई। जानकारी पर जिलाधिकारी कुणाल सिल्कू ने सीएमओ की अगुवाई में गठित पांच सदस्यीय टीम गठित की। जांच के दौरान पाया कि निजी चिकित्सक द्वारा इलाज के समय शिशु के माता-पिता से शल्य प्रक्रिया के लिए अनुमति नहीं ली गई। शल्य प्रक्रिया के पूर्व कोई भी जांच नहीं कराई गई। इसके पश्चात शिशु को चिकित्सालय में भर्ती कर आईवी एंटीबाइटिक चिकित्सीय निगरानी में रखना चाहिए था। तथ्य को छिपाने की कोशिश की गई कि कोई भी शल्य प्रक्रिया नहीं की गई। अभिलेखीकरण पूर्ण नहीं था। टीम में अपर उपजिलाधिकारी सदर अजीत कुमार जायसवाल, जिला चिकित्सालय के सर्जन डॉ. उजेर अतहर, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सलोनी जायसवाल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बांसी के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अश्वनी कुुमार शामिल रहे। सीएमओ डॉ. आरके मिश्र ने बताया कि रिपोर्ट सौंप दी गई है। कार्रवाई के निर्देश मिलने के बाद जल्द ही संबंधित हास्पिटल के संचालक व दोषी चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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लापरवाही पूर्वक उपचार से 17 दिन के नवजात की मौत के मामले में गठित पांच सदस्यीय जांच टीम की ओर से डीएम को सौंपी गई रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया डॉक्टर दोषी पाया गया है। जिलाधिकारी के निर्देेश पर जल्द ही स्वास्थ्य महकमा संबंधित प्राइवेट अस्पताल के खिलाफ बड़ी कार्रवाई कर सकता है।
उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के जिलाध्यक्ष अनिल सिंह ने 27 नवंबर 2018 को उच्चाधिकारियों समेत सदर थाने में तहरीर देकर आरोप लगाते हुए कहा था कि उसकी पत्नी की डिलेवरी नगर के नौगढ़-गोरखपुर मार्ग पर स्थित चर्चित प्राइवेट अस्पताल में हुई थी। बच्चा नार्मल पैदा हुआ था। यहीं उसका उपचार हो रहा था। बीते 18 नवंबर को बच्चे के सिर में फुंसी हो गई थी। उसके बाद अस्पताल के डॉ. को दिखाया। सुधार न होने पर 20 नवंबर को दोबारा चिकित्सक को दिखाया गया। उन्होंने बिना जानकारी दिए ही बच्चे के सिर में चीरा लगा दिया। इससे बच्चे की हालत बिगड़ गई। चिकित्सक के पास ले तो उन्होंने बाहर दिखाने का हवाला देते हुए पल्ला झाउ़ लिया। गोरखपुर एक अस्पताल में 22 नवंबर की रात बच्चे की मौत हो गई। गोरखपुर में अस्पताल के चिकित्सक ने बताया था कि गलत इंजेक्शन से बच्चे के शरीर में इंफेक्शन हो गया था, जिससे उसकी मौत हो गई। मामले में जिलाधिकारी कुणाल सिल्कू की ओर से सीएमओ की अगुवाई में गठित पांच सदस्यीय टीम ने जांच के दौरान पाया कि डाँ. द्वारा इलाज के समय शिशु के माता-पिता से शल्य प्रक्रिया के लिए अनुमति नहीं ली गई। शल्य प्रक्रिया के पूर्व कोई भी जांच नहीं कराई गई। इसके पश्चात शिशु को चिकित्सालय में भर्ती कर आईवी एंटीबाइटिक चिकित्सीय निगरानी में रखना चाहिए था। तथ्य को छिपाने की कोशिश की गई कि कोई भी शल्य प्रक्रिया नहीं की गई। अभिलेखीकरण पूर्ण नहीं था। टीम में अपर उपजिलाधिकारी सदर अजीत कुमार जायसवाल, जिला चिकित्सालय के सर्जन डाँ. उजेर अतहर, स्त्री रोग विशेषज्ञ डाँ. सलोनी जायसवाल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बांसी के बाल रोग विशेषज्ञ डाँ. अश्वनी कुुमार शामिल रहे। मुख्य चिकित्साधिकारी डाँ. आरके मिश्र ने बताया कि रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई के निर्देश मिलने की दिशा में जल्द ही संबंधित हास्पिटल क संचालक व दोषी चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।