मरीज को कंधे पर लादकर ले जाते तीमारदार
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सिद्धार्थनगर। सरकार भले ही स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने को दावा कर पर करें, पर हाल यह है कि जिला अस्पताल में एक भी स्ट्रेचर भी नहीं हैं। मानक के अनुरूप यहां आठ स्ट्रेचर होने चाहिए। एक स्ट्रेचर है वह भी काम लायक नहीं। ऐसे में इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को परेशान होना पड़ता है और तीमारदार उन्हें टांगकर वार्ड में पहुंचाते है।
100 बेड वाले जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन औसतन 800 रोगी उपचार के लिए आते हैं। वहीं इमरजेंसी में प्रतिदिन औसतन 60 से अधिक मरीज आते हैं। अस्पताल में स्ट्रेचर न होने के कारण तीमारदार मरीजों को टांग कर डॉक्टर के पास पहुंचाते है। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, अस्पताल में से कम से कम आठ स्ट्रेचर हैं। इमरजेंसी वार्ड में केवल एक ही स्ट्रेचर है, वह भी काम लायक नहीं है। इसके अलावा सर्जिकल वार्ड के बेडों की स्थिति भी ठीक नहीं है। टूटे बेड पर मरीजों का इलाज हो रहा है। सीएमएस डॉ रोचस्मति पांडेय ने बताया कि शासन को पत्र लिखा गया है। स्ट्रेचर आते ही मरीजों को सुविधा दी जाएगी। रही बात व्हील चेयर की तो वह जिला अस्पताल में मौजूद है।
मांगने पर मिलती है टूटने की जानकारी
कई बार ऐसा होता है कि स्ट्रेचर मांगने पर स्वास्थ्य कर्मी मरीजों और उनके तीमारदारों को स्ट्रेचर टूटने की जानकारी दी जाती है। इसके बाद मरीज खुद व खुद किसी तरह वार्ड में पहुंचते हैं। इमरजेंसी में इलाज कराने आई थरौली गांव निवासी धूपा देवी बताती है कि अस्पताल में आने के बाद स्ट्रेचर भी नहीं मिला। दो लोगों को बुलाकर किसी तरह इमरजेंसी में पहुंचीं। कुछ ऐसा ही हाल सावित्री का भी रहा। यह कहानी रोज की है। इसके बाद भी जिम्मेदार इस पर ध्यान नहीं दे रहे है।
व्हीलचेयर तक की सुविधा नहीं
जिला अस्पताल में पर्याप्त संख्या में व्हीलचेयर की सुविधा उपलब्ध नहीं है। जरूरत कम से कम 10 व्हीलचेयर की है। लेकिन मौजूदा समय में केवल चार व्हीलचेयर हैं। उसमें दो टूटी हुई हैं। ऐसे में कभी-कभार स्थिति यह जाती है कि दिव्यांग मरीज या फिर गंभीर मरीज इलाज के लिए आते है तो उन्हें दूसरों के सहारे वार्ड में पहुंचाया जाता है।