पॉलिथीन में सामान खरीद कर ले जाते लोग।
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सिद्धार्थनगर। प्रदेश में 15 जुलाई से 50 माइक्रोन से कम की पॉलिथीन प्रतिबंधित हो जाएगी। इसे देखते हुए प्रशासन ने अभी से इसकी तैयारी कर ली है। इसी क्रम में सरकारी दफ्तरों में प्लास्टिक के गिलास की जगह कुल्हड़ का प्रयोग होगा।
नगर विकास विभाग के सचिव अनिल कुमार वाजपेयी ने बताया कि सरकार पॉलिथीन को लेकर पूरी तरह से गंभीर है। 15 जुलाई से प्रतिबंध के बाद एक माह तक अभियान चलाकर प्रदेश को पॉलिथीन मुक्त किया जाएगा। पहले चरण में पॉलिथीन व प्लास्टिक के ग्लास बंद किए जाएंगे। इसके बाद व्यापक स्तर पर अभियान चलाकर थर्माकोल सहित अन्य प्लास्टिक के सामान बैन किए जाएंगे। प्रदेश में स्वच्छता अभियान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है।
डीएम कुणाल सिल्कू ने नगर पालिका और नगर पंचायत क्षेत्रों के ईओ को निर्देशित किया है कि अपने क्षेत्रों में अभियान चलाकर पॉलिथीन के प्रति लोगों को जागरूक करें। 15 जुलाई के बाद भी पॉलिथीन का प्रयोग करता हुआ कोई दुकानदार दिखता है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। सचिव अनिल कुमार बाजपेई ने बताया कि सरकार इस पर पूरी तरह से गंभीर है। इस पर तेजी से काम किया जा रहा है।
नहीं बेचेंगे पॉलिथीन
पॉलिथीन का कारोबार करने वाले व्यापारी सुखदेव ने बताया कि सरकार के निर्णय स्वागत योग्य है। जो माल बचा है। उसे किसी तरह बेचकर खत्म किया जा रहा है। बताया कि 50 माइक्रोन से कम की पॉलिथीन की श्रेणी में पन्नी, ग्लास, व थर्माकोल आते हैं। इसे अब नहीं बेचा जाएगा। अगर सरकार पॉलिथीन की जगह कुछ और लाती है तो उसे बेचा जाएगा। व्यापारी राजकुमार ने कहा कि सरकार ने निर्णय सोच समझकर लिया है। यह स्वच्छता के हित में है। अब पॉलिथीन नहीं खरीद रहे हैं। वहीं कुम्हार परदेशी ने बताया कि सरकार ने पॉलिथीन बंद कर उनके रोजगार को बढ़ावा देने का काम किया है। अब कुल्हड़ की बिक्री बढ़ेगी। साथ ही अब मिट्टी के छोटे-छोटे बर्तन बनाए जाएंगे, जो प्लास्टिक प्लेट की जगह ले सकें।