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Siddharthnagar News: 80 फीसदी बच्चे डायरिया के शिकार, दूध की बोतल से पनप रहे बैक्टीरिया

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मेडिकल कॉलेज के ओपीडी में बच्चों के स्वास्थ्य की जानकारी लेती डॉ. नम्रता चौधरी। संवद
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-बाल रोग विभाग में प्रतिदिन आ रहे 150 मरीज, सबसे अधिक डायरिया के
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-डॉक्टरों के अनुसार दूध के बोतल, बाहरी खानपान से बिगड़ रही सेहत
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। वर्तमान में डायरिया के मरीज बढ़ गए हैं। इससे सबसे अधिक शिकार बच्चे ही हो रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार दूध की बोतल की उचित सफाई न होने से बच्चों के पेट में बैक्टीरिया पहुंच रहे हैं। जो उन्हें डायरिया का रोगी बना रहा है। डॉक्टराें के मुताबिक 80 फीसदी से ज्यादा बच्चों के बीमार होने की वजह गंदी बोतलें हैं। गर्मी में बोतल में रखा दूध भी जल्द खराब हो जाता है।
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. नम्रता ने बताया कि वर्तमान समय में तापमान सामान्य से ज्यादा दर्ज हो रहा है। इस समय का तापमान बैक्टीरिया के अनुकूल है। इससे दूध समेत अन्य खाद्य पदार्थों में ई. कोली, साल्मोनेला, लैक्टोबैसिलस, स्ट्रेप्टोकोकस, स्टैफिलोकोकस व अन्य बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। अगर बोतल गंदी होती है तो ये और तेजी से पनपते हैं। यही बैक्टीरिया उल्टी-दस्त और डायरिया की वजह बनते हैं। उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज में वर्तमान समय में 150 से अधिक मरीज आ रहे है। इसमें डायरिया के चपेट में आने वालों की संख्या लगभग 80 फीसदी है। बताया कि पांच साल से कम उम्र के बच्चों को डायरिया होने पर यदि सही समय पर उचित इलाज न मिले तो मिर्गी जैसे झटके आने की भी आशंका होती है।
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उन्होंने बताया कि प्लास्टिक का बोतल होने से उसमें बैक्टिरिया और भी तेजी से पनपते है। जबकि मेडिकल कॉलेज में इलाज करवाने आने वाले तीमारदारों के अनुसार बोतल की सफाई भी बेहतर ढंग से नहीं कि जाती है। ऐसे में तीमारदारों को बोतल की सफाई का तरीका भी बताया जा रहा है।

ऐसे साफ करें दूध की बोतल
-बच्चे को दूध पिलाकर खौलते पानी में बोतल उबालें
-बोतल की निप्पल निकालकर उसे सही से साफ करें
-बोतल में उतना ही दूध डालें, जितना बच्चा पी सके
-एक बार का बचा दूध दोबारा बच्चे को मत पिलाएं
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इस तरह प्रभावित करती है बैक्टीरिया
-लैक्टोबैसिलस : दूध को दही में बदलने के लिए जिम्मेदार बैक्टीरिया की ज्यादा मात्रा दूध को खराब कर सकती है।
-स्ट्रेप्टोकोकस, ल्यूकोनोस्टोक, लैक्टोकोकस : ये दूध को खराब करता है। इसके प्रभाव से आंतों में संक्रमण की आशंका रहती है।
-ई. कोली, साल्मोनेला, स्टैफिलोकोकस : दूषित दूध में पनपते हैं। दूध को खराब करने के साथ ये बीमारी की वजह बन सकते हैं।
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