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परिषदीय विद्यालयों में बिना किताबों के हो रही पढ़ाई

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सिद्धार्थनगर। शासन की लाख कोशिशों के बाद भी जिले के परिषदीय विद्यालयों की खस्ताहाली सुधरने का नाम नहीं ले रही। एक अप्रैल से शैक्षिक सत्र शुरू होने के बाद भी अब तक बच्चों को मिलने वाली किताबें मुहैया कराने में विभाग विफल रहा है। मुख्यमंत्री के दौरे से पहले अपर मुख्य सचिव की समीक्षा बैठक में विभाग की पोल खुलकर सामने आ गई। बुधवार को जिले के सभी ब्लॉकों में पुस्तक वितरण की वास्तविक स्थिति की पड़ताल के दौरान भी चिंता जनक तश्वीर सामने आई। बच्चों को एक-एक किताब थमाकर विभाग ने 60 फीसदी से अधिक पुस्तक वितरण का आंकड़ा तैयार किया है।
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जिले में कुल 1924 प्राथमिक व 740 पूर्व माध्यमिक विद्यालय हैं। इन स्कूलों में कुल नामांकित छात्रों की संख्या 284147 है। इसके सापेक्ष अब तक केवल 170488 बच्चों को ही पुस्तकों का वितरण किया गया है। गौर करने वाली बात है कि जिन बच्चों को पुस्तक वितरित करने का दावा विभाग कर रहा है, उन्हें भी सभी विषयों की किताबें नहीं मिल पाई हैं। सदर ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय थरौली में कुल नामांकित बच्चों की संख्या 136 हैं। यहां कक्षा एक के बच्चों को छोड़कर किसी भी क्लास के बच्चों को पूरी किताबें नहीं मिल पाई हैं। प्रधानाध्यापिका कंचन मिश्रा ने बताया कि मिली किताबों को बांट दिया गया है। बाकी के लिए लिखा पढ़ी की गई है। उसका ब्लॉक के पूर्व माध्यमिक विद्यालय दतरंगवा में कुल नामांकित 106 बच्चों में से महज 60 को ही किताबें मिल सकी हैं। कक्षा छह, सात व आठ में 12 किताबें बच्चों को मिलनी चाहिए, मगर 6-7 किताबें ही दी गई हैं। अन्य विषयों की पढ़ाई भगवान भरोसे है। प्राथमिक विद्यालय में पंजीकृत 170 बच्चों में आधे से भी कम बच्चों को किताबें मिल पाई हैं। प्रधानाध्यिपका शशि सिंह ने बताया कि जो किताबें मिली थीं, उन्हें बांट दिया गया है। बर्डपुर ब्लॉक के पूर्व माध्यमिक विद्यालय काशीपुर में नामांकित 120 हैं। यहां अब तक नई किताबें नहीं आई हैं। पुरानी किताबों के सहारे बच्चों को बढ़ाया जा रहा है। प्रधानाध्यापक अब्दुल अजीज ने बताया कि किताबें न मिलने से बच्चों को नहीं दी जा सकी है। यही हाल प्राथमिक विद्यालय काशीपुर का भी रहा। यहां कुल नामांकित 182 बच्चे हैं। प्रधानाध्यापक तुफैल अहमद ने बताया कि नई किताबें नहीं मिली हैं। पुरानी किताबों से ही बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। प्राथमिक विद्यालय देवियापुर मेें 60 बच्चे हैं। सहायक अध्यापिका ऊषा देवी ने बताया कि नई पुस्तकें मिलने पर बच्चों को वितरित किया जाएगा। पूर्व माध्यमिक विद्यालय में भी नई किताबों का वितरण नहीं हो सका है। इस संबंध में बीईओ गोपाल मिश्र ने बताया कि नई पुस्तकें बीआरसी पर आ गई हैं। विद्यालयों पर भेजवाया जा रहा है। जल्द ही बच्चों को सभी पुस्तकों का वितरण कर दिया जाएगा। भनवापुर में कक्षा एक के बच्चों को ही मिली किताबें
अमर उजाला ब्यूरो
डुमरियागंज। भनवापुर ब्लॉक में मौजूद परिषदीय स्कूलों में आधी अधूरी किताबों से पढ़ाई हो रही है। यहां कक्षा एक को छोड़ किसी भी कक्षा में पूरी किताब नहीं पहुंचाई गई है। क्षेत्र के अभिभावक रमेश, दिनेश, रामकुमार, सजीवन आदि ने बताया कि स्कूलों में सरकारी किताबों को बांटने का दावा जिम्मेदारों द्वारा सिर्फ कागजों में पूरा किया जा रहा है। जहां 10 किताबें लगनी है, वहां बच्चों को सिर्फ एक ही किताब दिया गया है। इस संबंध में भनवापुर के प्रभारी बीईओ चंद्रभूषण पांडेय ने बताया कि ब्लॉक क्षेत्र में प्राथमिक और जूनियर मिलाकर कुल 225 विद्यालय हैं। जो पुस्तकें आई थी, उसे बच्चों में वितरित करा दिया गया है। अवशेष किताबों की लिस्ट बनवाकर जिले पर भेजी गई है। पुस्तकें मिलते ही, उनका वितरण करा दिया जाएगा।
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इटवा में भी नहीं हुआ नई किताबों का वितरण
अमर उजाला ब्यूरो
इटवा। इटवा विकास क्षेत्र में भी परिषदीय विद्यालयों की हालत बेहद चिंताजनक मिली। प्राथमिक विद्यालय पिपरी बुजुर्ग में गंदगी का अंबार था। यहां कुल नामांकित 104 बच्चों के सापेक्ष 57 बच्चे उपस्थित मिले। बच्चों को जरूरी किताबों का वितरण नहीं हो पाया है। पुरानी किताबों के सहारे पठन-पाठन को मजबूर हैं। जिन विषयों की किताबें नहीं मिल पाई हैं, उसकी पढ़ाई भगवान भरोसे चल रही है। प्राथमिक विद्यालय इटवा बक्शी में पंजीकृत 105 के सापेक्ष 57 बच्चे बुधवार को उपस्थित रहे। यहां भी कुछ नई व कुछ पुरानी किताबों से काम चलाया जा रहा था। इस संबंध में बीईओ ज्ञान चंद्र मिश्रा का कहना है कि प्रथम चरण में जो किताबें बीआरसी पर आई थीं, वह बच्चों को वितरित कर दी गई हैं। शेष किताबें आने पर उनका वितरण किया जाएगा।
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