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2866 ‘मुर्दों’ को मिल रहा वृद्धा पेंशन

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सिद्धार्थनगर। वृद्धा पेंशन वितरण में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई है। लाभार्थियों की सूची में 2866 ऐसे लोगों के नाम मिले हैं, जो कब का स्वर्गवासी हो चुके हैं। लिस्ट में 113 अपात्रों के भी नाम हैं। शासन के निर्देश पर हुए सत्यापन में इस गड़बड़ी की पोल खुली है। सभी के पेंशन पर रोक लगाते हुए हाल ही में भेजी गई तिमाही किस्त भी बैंकों से वापस मंगाने के निर्देश दिए गए हैं। अब यह पड़ताल की जा रही है कि मृतकों के खाते में पेंशन की राशि कब से भेजी जा रही है।
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निराश्रित बुजुर्गों को जीवन-यापन के लिए हर माह 300 से 500 रुपये तक पेंशन देने की योजना है। जिले में इस योजना के तहत कुल 65234 लाभार्थी हैं। सूबे में सत्ता परिवर्तन के बाद नई सरकार ने पेंशन लाभार्थियों के सत्यापन का निर्देश दिया था। डीएम ने सभी एसडीएम व बीडीओ के माध्यम से 15 से 30 जून तक सत्यापन कराया तो चौंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं। लाभार्थियों की सूची में 2866 नाम उन लोगों के हैं, जिनकी मृत्यु हो चुकी है। ऐसे लाभार्थियों की संख्या सबसे ज्यादा इटवा और बांसी तहसील क्षेत्र में है। इटवा सूबे के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय का गृह क्षेत्र है तो बांसी से विधायक जयप्रताप सिंह मौजूदा समय में प्रदेश के कैबिनेट मंत्री हैं। अकेले भनवापुर ब्लॉक में ही 437 मृतकों के नाम लिस्ट में शामिल हैं, जबकि मिठवल में 341 मृतक चिह्नित किए गए हैं। नगरीय क्षेत्र में सर्वाधिक 137 मृतकों के नाम बांसी नगर पालिका की सूची में पाए गए हैं। व्यापक गड़बड़ी की यह रिपोर्ट सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। फौरी कार्रवाई करते हुए डीएम ने इन सभी पेंशनरों के भुगतान पर रोक लगा दी है। अप्रैल, मई, जून की हाल में भेजी गई तिमाही किस्त को भी बैंकों से वापस लौटाने को कहा गया है।
ऐसे मिलती है पेंशन
चयनित लाभार्थियों को पेंशन का भुगतान सीधे उनके खाते में किया जाता है। 60 वर्ष की आयु पूरा करने वाले निराश्रित इसके लिए पात्र हैं। 80 वर्ष से कम आयु वालों को 300 व इससे अधिक आयु के लाभार्थियों को 500 रुपये प्रतिमाह पेंशन मिलती है। पेंशनर को हर छह माह पर बैंक में उपस्थित होकर अपने जीवित होने की पुष्टि करनी होती है। पेंशनरों के न आने या लेन-देन न होने पर बैंक उन्हें मृत समझकर सूची विभाग को प्रेषित कर देता है। उनके भुगतान पर रोक लग जाती है। सत्यापन में पकड़ में आए यह नाम ऐसे हैं, जिनके बारे में बैंकों से भी कोई सूचना नहीं आई थी। लिहाजा अनुमान लगाया जा रहा है कि पेंशनर की मौत इस अवधि में हुई है या फिर इनके नामों पर मृत्यु के बाद भी परिजन फर्जी तरीके से खाते से पैसा निकालते रहे हैं। इसमें विभागीय संलिप्तता से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
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कहां-कितने मृतक व अपात्र::
ब्लाक मृतक अपात्र
भनवापुर 437 1
खुनियांव 196 8
इटवा 174 7
डुमरियागंज 120 शून्य
खेसरहा 213 42
मिठवल 341 2
बांसी 265 44
नौगढ़ 121 शून्य
उसका 76 2
जोगिया 203 शून्य
लोटन 60 1
बर्डपुर 47 4
शोहरतगढ़ 153 2
बढ़नी 301 शून्य

बांसी नगर पालिका में 137 अपात्र
नगरीय क्षेत्र में 161 मृतकों के नाम सूची में पाए गए हैं। इसमें अकेले बांसी नगर पालिका क्षेत्र के 137 नाम हैं। डुमरियागंज में 11, शोहरतगढ़ नगर पंचायत के 10, बढ़नी में 3 मृतकों के नाम सूची में हैं। सिद्धार्थनगर और उसका नगर पंचायत में कोई मृतक या अपात्र नहीं है।

वृद्धा पेंशन के सत्यापन के दौरान 2866 मृतकों के नाम सूची में पाए गए हैं। इनके अलावा 161 अपात्र चिह्नित हुए हैं। इनके पेंशन पर तत्काल रोक लगा दी गई है। जारी अंतिम किस्त को बैंकों से वापस मंगाया जा रहा है। इनके बारे में छानबीन की जा रही है कि इनकी मृत्यु कब हुई और सूचना क्यों नहीं दी गई। -आशुतोष पांडेय, प्रभारी जिला समाज कल्याण अधिकारी।
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