सिद्धार्थनगर। स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत जानने के लिए स्टेट से नामित टीम ने तीन दिन में 14 ब्लॉक के लगभग 280 स्वास्थ्य इकाइयों में स्वास्थ्य सेवाओं की बारीकी से समीक्षा की। सुविधाएं और उसकी मौजूदा स्थिति का आकलन किया। शासन स्तर से दी जानी वाली सुविधाओं का जरूरतमंदों को कितना लाभ मिला है, इन पहलुओं को करीब से देखने के बाद टीम लौट गई। इसकी रिपोर्ट तैयार कर शासन को सौंपी जाएगी, जिसके बाद जिले में स्वास्थ्य का ढांचा कितना मजबूत यह सामने आएगा।
इसके बाद कहां खामी है और कहां क्या किया जाए, जिससे जरूरतमंंदों को स्वास्थ्य सेवाओं का सुलभता से लाभ मिल सके इस पर काम होगी। वहीं, स्थानीय स्तर पर मिली खामियों पर रिपोर्ट आने के बाद विभागीय कार्रवाई हो सकती है, ऐसा विभाग से जुड़े लोगों का कहना है।
शासन की ओर से स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में समय- समय पर ऑडिट करने का काम किया जाता है। इसमें शासन स्तर से टीम नामित की जाती है। एक जिले की टीम को दूसरे जिले में जाकर जांच करानी होती है। इसमें मौजूदा सुविधाओं को जरूरतमंदों को कितना लाभ मिल रहा है। स्थानीय स्तर पर क्या लापरवाही और कार्य में कार्य गड़बड़ी की जा रही है। उसमें सुधार कैसे हो, इन सभी बिंदुओं जांच करके शासन को रिपोर्ट नामित नोडल की ओर से भेजी जाती है। जनपद में देवी पाटन मंडल से आई टीम ने तीन दिन जांच की। 23 फरवरी को जांच करके टीम लौट गई। इसमें एक टीम को एक ब्लॉक क्षेत्र में 20 सीएचसी, पीएचसी, अर्बन पीएचसी और आरोग्य मंदिर की जांच का जिम्मा था। टीम ने महज तीन दिनों में 240 अस्पतालों का स्थलीय निरीक्षण कर एक तरह से ‘स्वास्थ्य ऑडिट’ पूरा किया।
14 ब्लॉकों में 20-20 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की पड़ताल के दौरान टीम ने दवा वितरण, ओपीडी रजिस्टर, जांच रिपोर्ट, साफ-सफाई, स्टाफ की उपलब्धता और मरीजों से व्यवहार तक की बारीकी से जांच की। अब सबकी निगाहें उस रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो शासन को भेजी जाएगी और जिसके आधार पर जिले की स्वास्थ्य सेवाओं में बड़े बदलाव संभव हैं।
इस संबंध सीएमआ डॉ. आरके चौरसिया ने बताया कि शासन से नामित टीम ने अस्पतालों का स्थानीय निरीक्षण करके मौजूदा सुविधाओं सहित कई बिंदुओं की जांच की है। उनकी ओर से शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी। इसके बाद जैसा दिशा-निर्देश मिलेगा, उसके हिसाब से काम किया जाएगा।
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जांच कुछ में जगहों पर मिली खामियां
निरीक्षण दल ने सबसे पहले अस्पतालों में आने वाले मरीजों की वास्तविक संख्या और रजिस्टर में दर्ज ओपीडी के आंकड़ों का मिलान किया। सूत्रों के अनुसार कई केंद्रों पर ओपीडी रजिस्टर और वास्तविक उपस्थिति में अंतर की बात सामने आई है। कुछ स्थानों पर जांच (पैथोलॉजी, ब्लड टेस्ट आदि) की संख्या और ओपीडी के आंकड़ों में भी भिन्नता पाई गई। टीम ने यह भी देखा कि शासन की ओर से उपलब्ध कराई जा रही निशुल्क दवाएं मरीजों को पूरी मात्रा में दी जा रही हैं या नहीं। दवा स्टॉक रजिस्टर, एक्सपायरी डेट, वितरण की पारदर्शिता और आयुष्मान कार्डधारकों को मिलने वाली सुविधाओं की भी जांच की गई। कई अस्पतालों में साफ-सफाई की स्थिति संतोषजनक नहीं पाई गई, जबकि कुछ केंद्रों पर शौचालय, पेयजल और प्रतीक्षालय की व्यवस्था कमजोर मिली। इसमें जोगिया ब्लॉक क्षेत्र में निरीक्षण में अस्पताल में गंदगी और कागजात के रख-रखाव में गड़बड़ी की बात सामने आई थी। इसके साथ स्वास्थ्य कर्मियों की कार्यकुशलता भी जांच के दायरे में रही। ड्यूटी रोस्टर, उपस्थिति रजिस्टर, समय पर डॉक्टर और स्टाफ नर्स की उपलब्धता, आपातकालीन सेवाओं की तैयारी और रेफरल सिस्टम की स्थिति को परखा गया। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े लोगों के मुताबिक टीम जांच रिपोर्ट शासन को भेजेगी। इसके आधार पर आगे जो कमियां होंगी वह पूरा होंगी।