...तो आसान नहीं होगी गठबंधन की ‘राह’
- सपा के दिग्गजों के बीच मनमुटाव कह रहे दूसरी कहानी
- अब खुलकर सामने आने लगा है विरोध
- एक नेता के कथित सपा ज्वाइन करने के बाद उभरा दर्द
नीरज मिश्र
सिद्धार्थनगर। लोकसभा चुनाव की नींव तो पड़ चुकी है, लेकिन जिले में अब तक किसी भी पार्टी ने प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। इस बीच सपा के दिग्गजों के बीच मनमुटाव लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। सोशल मीडिया से लेकर दिग्गजों के बीच बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। बसपा के एक नेता के कथित तौर पर सपा ज्वाइन करने के बाद यह सुर अचानक बदले हैं। इससे एक बात तो साफ हो गई है कि गठबंधन की राह जिले में इतनी आसान नहीं है। जितनी उम्मीद दिग्गजों ने की थी।
आम चुनाव की घोषणा के साथ ही राजनीतिक फिजा में नई सरकार के स्वरूप और संभावनाओं को लेकर सवाल तैरने लगे हैं, लेकिन इस बीच जिले में राजनीतिक सरगर्मियां पिछले दो दिनों में और तेज हो गई हैं। लोकसभा चुनाव के साथ-साथ कुछ बड़े जनप्रतिनिधि अपने भविष्य को सहेजने में जुट गए हैं। शोहरतगढ़ से बसपा के एक जनप्रतिनिधि का अभी हाल में ही सपा ज्वाइन करने की कथित चर्चा ने सपाइयों को दो धड़ों में बांट दिया है। एक धड़ा यह कह रहा है कि सपा में इंट्री हो चुकी है और भविष्य की तैयारी में जुट गए हैं। वहीं दूसरा धड़ा अब इस बात को एक सिरे से खारिज कर इसे केवल अफवाह बताया है। यहां तक की पार्टी के एक पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ता ने भी ज्वाइनिंग की बात नकारी है। फिलहाल अंदरुनी तौर पर बगावत की बूू आने लगी है। इससे जिले की राजनीति में आने वाले दिनों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
भविष्य की राजनीति सहजने में जुट गए दिग्गज
लोकसभा चुनाव के बाद दो साल बाद विधानसभा चुनाव होना है। लेकिन दिग्गज अभी से ही भविष्य की राजनीति सहजने में जुट गए है। राजनीतिक पंडितों की माने तो अचानक एक जनप्रतिनिधि का सांसद के खिलाफ बगावत करना यह संकेत दे रहा है कि वह भविष्य में दूसरे दल की सहारा लेंगे, जिसकी जमीन वह अभी से तलाशना शुरू कर दिए है। क्योंकि इससे पहले भी वह दूसरे दलों की सवारी कर चुके है। यह कोई एक जनप्रतिनिधि की कहानी नहीं है। जिले में कई ऐसे बड़े चेहरे है, जो कई दलों की सवारी कर चुके है।
जिसके जितने समर्थक, उसके उतने प्रत्याशी
फिलहाल अब तक किसी दल की ओर से पत्ता न खोला जाना जिले की लोगों की बैचेनी को बढ़ा दिया है। उस पर सोशल मीडिया पर हो रहे प्रचार और प्रसार ने आधा दर्जन लोगों को लोकसभा का प्रत्याशी घोषित कर रखा है। जिसके जितने समर्थक उसके उतने प्रत्याशी। इसकी वजह से हर घंटे प्रत्याशी बदलने की चर्चा भी बड़ी जोर मार रही है।