बिना डिग्री किया था ऑपरेशन, अस्पताल सील
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- गलत ऑपरेशन से बच्चे की मौत के मामले में हुई कार्रवाई
- पुलिस की मौजूदगी में टीम ने की कार्रवाई
- डीएम के निर्देश पर जांच के लिए पांच सदस्यीय टीम बनी थी
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। गलत ऑपरेशन करने से 17 दिन के मासूम की मौत के मामले में प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए नगर के आपोलो अस्पताल को डॉक्टरों की टीम ने पुलिस फोर्स की मौजूदगी में शनिवार को सील कर दिया। अस्पताल में भर्ती आठ मरीजों को एंबुलेंस के माध्यम से जिला अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया। यह कार्रवाई सीएमओ की रिपोर्ट के आधार पर डीएम के निर्देश पर की गई है।
उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष अनिल सिंह ने सदर पुलिस व उच्चाधिकारियों को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया था कि नगर के आपोलो अस्पताल में उनकी पत्नी का सामान्य प्रसव हुआ था। 18 नवंबर को बच्चे के सिर में फुंसी से हुई थी। बच्चे को डॉक्टर अब्दुल्लाह को दिखाया गया तो उसने दवा दे दिया। इस बीच बच्चे की हालत ठीक होने के बजाए खराब हो गई। फिर से उसे 20 नवंबर को दिखाया। इसके बाद डॉक्टर ने बिना जानकारी के बच्चे के सिर में चीरा लगा दिया। इसके बाद हालत और बिगड़ने लगी। सवाल करने पर डॉक्टर ने भगा दिया गया था। इसके बाद गोरखपुर के अस्पताल में ले गए, जहां 22 नवंबर को बच्चे की मौत हो गई। वहां के डॉक्टर ने गलत इंजेक्शन से मौत होने की बात कही है। शिकायत के बाद डीएम ने सीएमओ की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय जांच टीम गठित की थी। टीम ने डीएम को इस मामले की रिपोर्ट दी थी। डीएम के निर्देश पर डॉ. सौरभ चतुर्वेदी के अगुवाई में बनी टीम में डॉ. प्रशांत अस्थाना, डॉ. एसके पटेल और पुलिस टीम फोर्स के साथ शनिवार की सुबह 11 बजे अस्पताल पहुंची। इसके बाद अस्पताल को सील किया गया। अस्पताल के आईसीयू वार्ड में भर्ती तीन बच्चों व पांच अन्य मरीजों को एंबुलेंस की मदद से जिला अस्पताल भेजा गया। अस्पताल को सील होता देख मौके पर भारी भीड़ मौजूद रही। टीम के प्रभारी डॉ प्रशांत अस्थाना ने बताया कि अपोलो हास्पिटल में बिना किसी डिग्री के ऑपरेशन किया जाता था। इसकी वजह से सील करते हुए डॉक्टर अबदुल्ला के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इस दौरान सदर थाने में तैनात निरीक्षक रामदरस आर्य, एसआई राजेश दुबे, एसआई रिंकू तिवारी, एसआई जितेंद्र मिश्र सहित भारी संख्या में फोर्स मौजूद थी। अस्पताल संचालक विनोद गुप्ता ने कहा कि अस्पताल के मानक के सारे कागजात हैं। बिना नोटिस दिए ही टीम ने अस्पताल को सील कर दिया है, जो प्रशासन के तानाशाही रवैया को दर्शा रहा है। मामले में नोटिस देकर कार्रवाई करनी चाहिए थी। लेकिन ऐसा नहीं किया गया।