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सेप्टिक टैंक फुल, शौच के लिए बाहर जा रहीं प्रसूता

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नौगढ पीएचसी के लेबर रूम का शौचालय प्रयोग के योग्य नहीं है। - फोटो : amar ujala
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सिद्धार्थनगर। स्वच्छ भारत मिशन के तहत खुले में शौच न जाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। शौचालय का उपयोग करने की सलाह दी जा रही है, लेकिन जब शौचालय ही इस्तेमाल के योग्य न हो तो लोग क्या करेें। कुछ ऐसा ही हाल नौगढ़ पीएचसी का है। सेप्टिक टैंक फुल हो जाने से यहां शौचालय इस्तेमाल के लायक नहीं है। ऐसे में प्रसूताएं और उनके तीमारदार खुले में या फिर अन्यत्र शौच के लिए जाने को मजबूर हैं। यह समस्या करीब एक माह से है। इससे लोगों को निजात कब मिलेगी, इस बारे में जिम्मेदार मौन हैं।
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नौगढ़ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर शहर से सटे 50 से अधिक गांवों की महिलाएं प्रसव और इलाज के लिए आती हैं। सप्ताह में 10 से अधिक ऑपरेशन भी होते हैं। बुधवार को भी दो प्रसव हुए। इस स्थिति में प्रसूता को औसतन सात दिन अस्पताल में रखा जाता है। ऐसे में शौचालय का सेप्टिक टैंक फुल होने से यह उपयोग के लायक नहीं है। प्रसूता के साथ आईं खैरुनिशा ने बताया कि डिलीवरी रूम का शौचालय बंद है। ऐसे में शौच के लिए बाहर जाना पड़ता है। कुछ ऐसी ही बात जलीमू, मदीना खातून और सरवर जहां ने भी बताई। कहा, इतनी बड़ी समस्या पर विभाग गंभीर नहीं है।

नगरपालिका को दे चुके हैं सूचना
प्रभारी पीएचसी चिकित्साधिकारी प्रशांत मौर्य ने बताया कि कुछ दिन पहले ही चार्ज लिया है। शौचालय का सेप्टिक टैंक फुल होने की जानकारी मिली है। इस में नगरपालिका के जिम्मेदारों से पत्राचार किया गया है और फोन पर जानकारी भी दी गई है। नगरपालिका के कर्मी सीवर मशीन खराब होने की बात कहकर मामले को टाल रहे हैं। वहीं सीएमओ डॉ. आरके मिश्रा ने बताया कि पीएचसी के शौचालय के साथ ही उनके कार्यालय व दफ्तर में भी टैैंक फुल है। इस संबंध में नगर पालिका प्रशासन को पत्र लिखा गया है। 
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ईओ बोले, जल्दी होगी सफाई 
नगरपालिका सिद्धार्थनगर के ईओ शैलेंद्र कुमार ने बताया कि सीवर मशीन खराब है। इस कारण सेप्टिक टैंक की सफाई नहीं हो पा रही है। मजदूरों से सफाई कराने को कहा गया। इसमें समस्या यह है कि मजदूर टैंक को साफ कर गंदगी कहां ले जाएं। नौगढ़ पीएचसी शहर के बीचोंबीच है और ऐसे में गंदगी निकालने के बाद कैंपस में काफी दुर्गंध फैलेगी। ऐसे में मशीन से ही टंकी की सफाई संभव है। प्रयास किया जाएगा कि शुक्रवार को सफाई करा दी जाए जिससे मरीजों को दिक्कतों का सामना न करना पड़े। 
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