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गोशालाओं में होगी पथ प्रकाश और हैंडपंप की व्यवस्था

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गोशालाएं में लगेंगी स्ट्रीट लाइट, हैंडपंप भी लगेगा
प्रमुख सचिव ने दिया निर्देश, जिले में संचालित हो रही हैं 70 गोशालाएं

अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। छुट्टा पशुओं से निजात दिलाने के लिए जिले में संचालित हो रही 70 गोशालाओं को सुविधा संपन्न बनाया जाएगा। इसके तहत इनमें प्रकाश की व्यवस्था की स्ट्रीट लाइट (पथ प्रकाश) लगेंगी। पशुशालाओं में हैंडपंप और टीन शेड की व्यवस्था भी की जाएगी। ये सभी कार्य ग्राम पंचायतों द्वारा कराए जाएंगे। इस संबंध शासन के प्रमुख सचिव ने जिला पंचायती राज विभाग के निदेशक को पत्र भी भेजा है।
प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के सीएम बनने के बाद अवैध स्लाटर हाउस बंद हुए। इससे छुट्टा पशु एकाएक बढ़ गए। किसानों को इस समस्या से निजात दिलाने के लिए प्रदेश भर में अस्थाई गोशाला खोलने के निर्देश दिए गए। गोशालाएं न्याय पंचायत स्तर पर बनाई जानीं थी। वर्तमान में जिले में महज 70 गोशालाएं संचालित हैं। इसमें करीब 2300 से अधिक पशु हैं। बीडीओ व एसडीएम की निगरानी में पशुओं को रखने की व्यवस्था बनाई गई। चारा, पानी और स्वास्थ्य पर ध्यान देने के लिए जिम्मेदारी तय की गई। लेकिन इसके बाद भी पशुओं की मौत होती रही। इस पर प्रशासन ने जब मंथन शुरू किया तो पता चला कि पशुओं की मौत बेहतर व्यवस्था न होने के कारण हो रही है। इसे लेकर सरकार ने स्थाई और अस्थाई गोशाला में हैंडपंप और पथ प्रकाश की व्यवस्था कराने का निर्देश दिया गया है। हैंडपंप लगने से पशुओं को पानी पीने की दिक्कत दूर होगी। शेड बन जाने से भूसा रखने में सहूलियत मिलेगी और वह खराब नहीं होगा।
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शासन के प्रमुख सचिव अनुराग श्रीवास्तव ने इस संबंध में निदेशक पंचायती राज विभाग पत्र भी भेजा है। माना जा रहा है कि इन व्यवस्थाओं के होने गोशाला में काम करने वालों को भी सहूलियत मिलेगी। डीपीआरओ एके सिंह ने बताया कि शासन की ओर से पत्र मिला है। शासन के मंशानुसार पालन कराया जाएगा।

70 गोशालाएं हो रहीं संचालित
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, न्याय पंचायत स्तर पर गोशाला खोले जाने की योजना थी। मगर अब तक जिले की 70 न्याय पंचायतों में अस्थायी गोशाला का निर्माण हो चुका है। इनमें करीब 2300 से अधिक पशु रखे गए हैं।
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गोशाला का कलर भी भगवा
महरिया में बनी स्थायी गोशाला का कलर भी भगवा है। इसकी वजह से दूर से ही गोशाला की पहचान हो जा रही है। जानकारी के अनुसार, इसके निर्माण में एक करोड़ 20 लाख की लागत आई है। वहीं बांसी में एक और स्थायी गोशाला बनाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है।
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