सिद्धार्थनगर। नए सिरे से शौचालय की प्रगति को लेकर समीक्षा की गई। जून में 86 हजार शौचालय का निर्माण कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। तय सीमा में यह लक्ष्य पूरा नहीं होता है तो प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई भी की जाएगी।
चुनाव आचार संहिता खत्म होने के बाद एक बार फिर धीमी गति से चल रही योजनाओं की रफ्तार तेज हुई है। जून में पंचायती राज विभाग को 86 हजार इज्जतघर के निर्माण का लक्ष्य मिला है। 23 दिन में निर्माण पूरा कैसे होगा। यह विभाग के सामने चुनौती है। जिले को गत वर्ष दो अक्तूबर को ओडीएफ घोषित किया जा चुका है, लेकिन अभी तक अधिकांश परिवार के पास इज्जतघर नहीं है।
स्वच्छ भारत, स्वस्थ्य भारत की परिकल्पना को पूरा करने के लिए केंद्र की मोदी सरकार स्वच्छ बनाने के लिए पिछली सरकार में स्वच्छ भारत अभियान का आगाज किया था। योजना के तहत साफ-सफाई के साथ-साथ खुले में शौच से मुक्त गांव बनाने की कवायद शुरू की गई थी। हर घर में इज्जतघर बनाने का काम शुरू किया गया था। इसके लिए ग्रामीण लाभार्थियों को 12 हजार रुपये दो किस्तों में देने की योजना है। विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो पंचायती राज विभाग की ओर से अब तक साढ़े तीन लाख लोगों को शौचालय के लिए पात्र माना गया है। गत अक्तूबर में जिले को खुले में शौच से मुक्त घोषित कर दिया गया। मगर शौचालय निर्माण अपेक्षा के अनुरूप नहीं हो सका। ऐसे में एक बार फिर आचार संहिता खत्म होते ही काम में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार के अति महत्वाकांक्षी योजना में शामिल इज्जतघर निर्माण में अगर लापरवाही की गई तो प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई भी होगी। यही वजह है कि 23 दिनों में 86 हजार इज्जत घर के निर्माण विभाग को कराना है।
डीपीआरओ अनिल सिंह ने बताया कि जून में 86 हजार इज्जत घर का निर्माण करने के लिए संबंधित सेक्रेटरी और प्रधानों को निर्देशित किया जा चुका है। अगर निर्माण कार्य समय पर नहीं होता है तो कार्रवाई की जाएगी।
डेढ़ लाख लाभार्थी वंचित
विभागीय आंकड़ों की मानें तो जिले में साढ़े तीन लाख लाभार्थियों का चयन किया गया था। अब तक दो लाख शौचालय का निर्माण हो सका है। इस औसत से अभी डेढ़ लाख लाभार्थी योजना से वंचित हैं। अगर जून में 86 हजार शौचालय बन जाते हैं तो ये आंकड़े कम हो जाएंगे।
कार्य पर भी सवाल
स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत वर्ष 2015 में हुई थी। तब से अबतक केवल दो लाख शौचालय का निर्माण हो पाया है। एक माह में 86 हजार शौचालय का निर्माण करना विभाग के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।