सिद्धार्थनगर। छुट्टा पशुओं से किसानों और आम लोगों को निजात दिलाने के लिए 10 जनवरी तक जिले की 152 न्याय पंचायतों में अस्थाई गोशालाओं का निर्माण होना था। शासन के निर्देश के बावजूद अब तक सिर्फ बांसी, शोहरतगढ़ व डुमरियागंज में ही गोशालाएं बन सकीं। ऐसे में किसान फसलों की रखवाली करने के लिए रतजगा करने के लिए मजबूर हैं।
प्रदेश भर में मुसीबत बन चुके छुट्टा पशुओं से किसानों व आम लोगों को निजात के लिए सरकार प्रदेश भर में पहले चरण में अस्थाई गोशाला निर्माण की मंजूरी दी है। इसके लिए पालिका से लेकर विभिन्न विभागों को जिम्मा सौंपा गया। शोहरतगढ़ की गोशाला से एक सप्ताह पहले ही 100 से अधिक पशुओं का लापता हो जाना इस बात का प्रमाण है कि पशुओं को किस प्रकार से रखा जा रहा है। बर्डपुर नंबर-14 के किसान रामसुरेश, मोल्हू, राकेश, मुजीबुल्लाह, रफीक आदि ने बताया कि पहले धान को बचाने के लिए रखवाली की गई। अब ठंड में गेहूं की फसल की रखवाली के रतजगा करना पड़ा है। सबसे ज्यादा परेशानी जमुआर नाले के इर्द-गिर्द बसे गांवों के किसानों को है। जहां पर लोग दिन और रात दोनों समय रखवाली कर गेहूं और तिलहन की फसल को बचा रहे हैं। डीएम कुणाल सिल्कू ने बताया कि छुट्टा पशुओं से निजात के लिए 152 न्याय पंचायत स्तर पर गोशाला का निर्माण कराया जाना है। अब तक 39 न्याय पंचायतों में जमीन चिह्नित कर समितियों का गठन कर दिया गया है। 10 दिनों में शेष गोशालाओं के लिए जमीन चिह्नित कर निर्माण शुरू करा दिया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी संबंधित तहसील के उपजिलाधिकारियों को सौंपी गई है। शोहरतगढ़ और बांसी और डुमरियागंज तहसील में गोशाला तैयार हैं। यहां छुट्टा पशुओं को रखा भी जा रहा है।