फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दो विभागों के पेंच में अटका एनएच-233 का निर्माण

Fri, 08 Mar 2019 10:43 PM IST
brijesh kumar ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
विज्ञापन
शहर के बांसी रोड एनएच पर नाले के बीच विजली का पोल। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
सिद्धार्थनगर। दो विभागों के पेच में एनएच-233 का निर्माण कार्य अटका पड़ा है। जबकि दोनों विभागों को मुआवजे के तौर पर मिलने वाली 75 करोड़ की राशि सौंपी भी जा चुकी है। बावजूद इसके विभाग अड़ंगा लगाए बैठा है। लिहाजा एनएच का निर्माण कार्य प्रभावित हो रहा है। जबकि निर्माण कार्य न होने से पिछले चार साल से जिले की जनता दुश्वरियां झेल रही है। इन विभागों में विशेष भूमि अधियापित(एसएलओ) और बिजली निगम शामिल हैं। इसे लेकर निर्माण कार्य करने वाली संस्था जेएसपी प्रोजेक्ट के एमडी विवेक गर्ग डीएम को पत्राचार भी कर चुके हैं। फिर भी मामला सुलझ नहीं पा रहा है।
विज्ञापन

आधे-अधूरे एनएच के निर्माण की जिम्मेदारी 27 नवंबर’ 18 को जेएसपी प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड को मिली। इसमें रुधौली से लेकर ककहरवा बॉर्डर (65 किलोमीटर) तक का निर्माण कार्य शामिल है। इसके कंपनी ने तेजी से काम शुरू कर दिए। बांसी से लेकर बर्डपुर तक तक तेजी से हुआ। साथ ही नौगढ़ बाईपास पर भी 50 प्रतिशत से अधिक काम पूरे हो चुके हैं। लेकिन इस बीच बर्डपुर, ककरहवा जोगिया और बांसी में काम ही नहीं शुरू हो सका। कंपनी के एमडी विवेक गर्ग ने बताया कि तीनों कस्बों में करीब दो दर्जन से अधिक घर होंगे, जिनको तोड़ना है। बताया कि विशेष भूमि अधियापति विभाग को मुआवजे के तौर पर 71 करोड़ की राशि दी जा चुकी है। बिजली निगम को इन कस्बों से पोल, तार व ट्रांसफार्मर हटाए जाने हैं जिसके लिए बिजली निगम को भी चार करोड़ की राशि दो साल पहले दी जा चुकी है। फिर भी अब तक न तो ट्रांसफॉर्मर हटाए गए और न ही पोल। इसकी वजह से काम में लगातार देरी हो रही है। बिजली निगम के अधीक्षण अभियंता एके श्रीवास्तव ने बताया कि रुपये तो मिल गए हैं। धीरे-धीरे पोल और ट्रांसफार्मर हटाए जा रहे हैं। इसमें थोड़ा समय लग रहा है। एक्सईन से लेकर जेई तक को इस काम में लगाया गया है।

निर्माण न होने पर लोगों ने किया था विरोध
एनएच निर्माण का काम करीब दो साल तक रुका पड़ा था। लिहाजा भाजपा सांसद सहित स्थानीय विधायकों को लोगों का काफी विरोध झेलना पड़ा था। वहीं, नौगढ़, जोगिया और ककहरवा में कई बार स्थानीय लोग धरना प्रदर्शन कर विरोध भी दर्ज करा चुके हैं। इसके बाद जब काम शुरू हुआ तो लोगों को लगा कि अब धूल और गड्ढे से निजात मिल जाएगी। लेकिन दोनों विभागों के पेच में फंसने के कारण फिर से ककरहवा, बांसी, जोगिया कस्बावासियों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
विज्ञापन


कहीं राजनीतिक दबाव तो नहीं
बर्डपुर, जोगिया और ककहरवा में एनएच-233 की जद में आ रहे हैं। यह माना जा रहा है कि कहीं राजनीतिक दबाव की वजह से प्रशासन मुआवजे की राशि तो नहीं बाटना चाह रहा है। क्योंकि लोकसभा चुनाव की घोषणा कभी भी हो सकती है। ऐसे में अगर चुनाव से पहले किसी का घर टूटा तो इसकी नाराजगी का भी दंश न झेलना पड़े।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें