डुमरियागंज (सिद्धार्थनगर)। पांच दिन पूर्व मंदिर चौराहे से स्टांप विक्रेता की साइकिल और उसके झोले सहित उसमें रखा करीब 3 लाख रुपये के स्टांप की चोरी का पर्दाफाश नहीं होने से क्षुब्ध स्टांप वेंडरों ने मंगलवार को हड़ताल कर धरना दिया। उनके समर्थन में अधिवक्ताओं ने भी न्यायिक कार्य ठप रखकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर आपत्ति जताई। हड़ताल के चलते स्टांप और अन्य जरूरी कागजात न मिलने से लोग काफी परेशान रहे। दोपहर बाद गुमशुदगी को चोरी के मुकदमे में तब्दील करने पर हड़ताल समाप्त हुआ।
तीन अगस्त की शाम तहसील के स्टांप विक्रेता मनबहाल श्रीवास्तव अपने गांव जखौली जा रहे थे। नगर के मंदिर चौराहे पर स्थित एक किराने की दुकान से सामान खरीदने के लिए रुके और साइकिल खड़ी कर अंदर गए। वापस लौटे तो स्टांप से भरे झोले समेत साइकिल गायब थी। उनकी तहरीर पर पुलिस ने गुमशुदगी का मुकदमा दर्ज किया था। इससे आक्रोशित स्टांप विक्रेता संघ ने सोमवार तक पुलिस को अल्टीमेटम दिया था। तय कार्यक्रम के तहत मंगलवार को तहसील खुलते ही स्टांप विक्रेता संघ के सदस्य गेट पर बैठ गए। हड़ताल को अधिवक्ताओं ने भी अपना समर्थन देकर न्यायिक कार्य ठप रखने का फैसला लिया। गेट पर बैठकर लोगों का आवागमन भी बंद कर दिया। करीब 10 बजे एसडीएम की गाड़ी को भी लोगों ने अंदर नहीं जाने दिया। दोपहर करीब 1 बजे तक सभी लोगों ने गेट पर बैठकर पुलिस-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। करीब डेढ़ बजे एसडीएम राजेंद्र प्रसाद के हस्तक्षेप के बाद गुमशुुदगी को चोरी के मुकदमे में तरमीम करने पर स्टांप वेंडर और अधिवक्ता काम पर लौटे। धरने को अधिवक्ता संघ के कृष्णमोहन श्रीवास्तव, आशीष श्रीवास्तव, राजेश दुबे, शैलेंद्र रावत, गणेश शंकर लाल श्रीवास्तव, हृदयराम पासवान, सरस श्रीवास्तव, स्टांप विक्रेता रामजी श्रीवास्तव, जुगुल किशोर, वेद प्रकाश श्रीवास्तव, जय श्याम श्रीवास्तव, अनिल कुमार आदि मौजूद रहे। इस संबंध में एसडीएम राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि सुबह से लोग हड़ताल पर थे। चोरी का मुकदमा दर्ज होने के बाद आंदोलन समाप्त कर अपने-अपने काम पर लौट गए हैं। दोपहर बाद से तहसील में न्यायिक और स्टांप बिक्री का काम रोज की तरह शुरू हो गया है।