संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। फर्जीवाड़ा कर करोड़ों की 12 बीघा सरकारी भूमि को अपने नाम कराने के मामले में एसडीएम नौगढ़ कोर्ट ने वापस सरकारी घोषित कर दिया। मामले में 10 वर्ष से चल रहे वाद में मंडलायुक्त बस्ती व जिलाधिकारी ने मामले की सुनवाई करते हुए निर्णय के लिए एसडीएम न्यायालय को आदेश दिया था।
नौगढ़ तहसील के पकड़ी जोगिया राज्य मार्ग पर ग्राम महदेवा तिवारी में स्थित इस करोड़ों की भूमि अब सरकारी परियोजनाओं के लिए उपयोगी साबित होगी।
उसका ब्लॉक के ग्राम चौरासी की तत्कालीन प्रधान कमलावती ने 25 अप्रैल 2015 को तहसील में शिकायती पत्र दिया था। इसमें आरोप लगाया था कि चौरासी ग्रामसभा के टोला महदेवा तिवारी में सड़क किनारे स्थित तीन गाटों की बेशकीमती 12 बीघा सरकारी भूमि को फर्जीवाड़ा कर इमरान, अनवर पुत्रगण आफताब आलम के नाम दर्ज करा लिया गया है।
इस पर तत्कालीन पीठासीन अधिकारी ने 16 मई 2015 को ग्राम महदेवा तिवारी में त्रुटिपूर्ण एवं फार्मी अंकन को निरस्त करते हुए उक्त गाटों को वापस ग्राम सभा, बंजर के खाते में दर्ज किए जाने का आदेश पारित किया गया। इसके बाद इमरान, अनवर पुत्र आफताब आलम ने आयुक्त बस्ती मण्डल बस्ती के यहां निगरानी दाखिल की गई, जिसमें अपर आयुक्त न्यायिक बस्ती मंडल बस्ती ने दो मार्च 2020 को निगरानी स्वीकार करते हुए पत्रावली अवर न्यायालय को इस निर्देश के साथ भेजी गई कि जांच कराते हुए वाद का निस्तारण गुणदोष के आधार पर दो माह में करें। तथा अवर न्यायालय के अंतिम आदेश तक विवादित भूमि के क्रय विक्रय पर रोक लगा दी।
इसी बीच इमरान आदि द्वारा जिलाधिकारी के न्यायालय में वाद दाखिल किया गया, जिसमें डीएम ने सुनवाई के बाद इमरान आदि द्वारा प्रस्तुत स्थानांतरण प्रार्थनापत्र साक्ष्य विहीन, अपुष्टि व निराधार होने के कारण सात अगस्त 2024 को निरस्त कर दिया। जिलाधिकारी ने 20 दिसंबर 2024 को विस्तृत आदेश पारित किया।
इसमें सभी पक्षों को सुनवाई का सम्यक अवसर प्रदान करते हुए मामले को विधिक वाद के रूप में विचारण न करके राजस्व अभिलेख खतौनी में किस आधार पर आपत्तिकर्तागण का नाम अंकित हुआ है।
उसका सम्यक परीक्षण करते हुए एक माह के अंदर गुणदोष के आधार पर निर्णय पारित करना सुनिश्चित करें। इस बीच इसके बाद एसडीएम नौगढ़ कोर्ट ने डीजीसी (राजस्व) से विधिक अभिमत मांगा।
इसके बाद कई तारीखों पर सुनवाई करने और मौका देने के बाद 27 फरवरी को एसडीएम नौगढ़ कल्याण सिंह मौर्या ने फैसला सुनाया। इसमें पक्षों को पर्याप्त अवसर देने के बाद भी पत्रावली में इमरान, अनवर पुत्रगण आफताब आलम द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य नही प्रस्तुत किया गया कि उनके पक्ष में पट्टा की कार्रवाई की गई है।
पत्रावली के अवलोकन से विदित होता है कि उपरोक्त गाटों पर फर्जी तरीके से इंद्राज किया गया है, जिसे दुरूस्त किया जाना न्याय संगत प्रतीत होता है। इसलिए ग्राम महदेवा तिवारी में स्थित तीन गाटों पर इमरान, अनवर, पुत्रगण आफताब आलम के नाम दर्ज फर्जी अंकन निरस्त करते हुए गांव सभा, बंजर के खाते में वापस दर्ज किया जाए।