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महिलाओं के बैठने की नहीं है व्यवस् था

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सिद्धार्थनगर। जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराने के लिए आने वाली गर्भवती व अन्य महिलाओं के लिए बैठने की व्यवस्था नहीं होने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें गैलरी व अन्य स्थानों पर बैठ कर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। यह हाल तब है जब कमिश्नर ने जिला अस्पताल के निरीक्षण के दौरान अव्यवस्था देखकर नाराजगी जताते हुए, तत्काल बैठने की व्यवस्था कराने का निर्देश दिया था। बावजूद इसके जिम्मेदार बेखबर हैं। यहां तक कि अल्ट्रासाउंड करने वाले चिकित्सक भी दो ही दिन आते हैं, जिससे इलाज के लिए आने वाली महिलाओं को निराश लौटना पड़ता है।
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सरकार महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने के भले ही लाख दावे व घोषणाएं कर रही हो, मगर जिम्मेदारों की उदासीनता से न तो उन्हेें सुविधा मिल रही न सहूलियत। जिला अस्पताल की भी कुछ ऐसी ही स्थिति है। यहां अल्ट्रासाउंड कराने के लिए प्रतिदिन सैकड़ों गर्भवती व अन्य महिलाएं आती हैं। बैठने की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्हें गैलरी व अन्य स्थान पर बैठकर अपनी बारी कर इंतजार करना पड़ता है। यहां मरीजों व उनके साथ आए परिजनों को बैठने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है। इससे सबसे अधिक समस्या उन महिलाओं को हो रही जो गर्भवती रहती हैं। उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्हें जमीन पर लेटना पड़ता है। इस बीच लोगों के बार- बार आने- जाने पर उन्हें उठने बैठने में बहुत कठिनाई होती है। दूर-दराज से आई महिलाएं घंटो जमीन पर बैठकर समय काटती हैं। पर जिम्मेदारों को यह दिक्कत नहीं दिखाई दे रही है। जबकि जिला अस्पताल के निरीक्षण के दौरान कमिश्रर ने अल्ट्रासाउंड कक्ष को देखा था और मरीजों को बैठने की जल्द व्यवस्था कराने का निर्देश दिया था। बावजूद इसके अभी तक बैठने के लिए कुर्सी की व्यवस्था नहीं की गई है। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के लिए आई सैनुआ निवासी किसलावती और कटकी निवासी गुडिय़ा कहती हैं कि यहां हर प्रकार की समस्याएं हैं। नंबर लगाने के बाद घंटो इंतजार करना पड़ता है। बैठने की व्यवस्था नहीं होने के कारण गैलरी में बैठना पड़ा रहा है। कोई ध्यान नहीं देने वाला है। इस संबंध में सीएमएस डॉ. रोचस्मति पांडेय ने बताया कि अल्ट्रासाउंड में तैनात चिकित्सक बैठते हैं। अदालत के मामलों में उन्हेें अक्सर कोर्ट जाना पड़ता है। उनके अनुपस्थिति में इमरजेंसी केस में अन्य डॉक्टरों से काम करवाया जाता है। रही बात बैठने की व्यवस्था की तो जल्द ही टेंडर निकालकर कुर्सी की व्यवस्था करवाई जाएगी।

दो दिन रहते हैं डॉक्टर
अल्ट्रासाउंड कक्ष में तैनात डॉक्टर राजीव रंजन सप्ताह में मात्र दो ही दिन बैठते हैं। मंगलवार और शुक्रवार को। बाकी दिन कमरे का तो ताला खोल दिया जाता है, लेकिन वह मौजूद नहीं रहते हैं। अस्पताल में उनकी गैर मौजूदगी से दूर-दराज से आए मरीजों का मायूस लौटना पड़ता है।
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