जिला अस्पताल में बना आयुष विंग का भवन।
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सिद्धार्थनगर। संयुक्त जिला अस्पताल परिसर में बनकर तैयार आयुष विंग का भवन का प्रयोग अस्थाई स्टोर के रूप में किया जा रहा है। जबकि इस भवन का 15 अक्तूबर 2016 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव लोकार्पण भी कर चुके हैं। वहीं बनने के दो साल बाद भी उपकरणों की उपलब्धता न होने के सीएमएस इसे हैंडओवर नहीं ले रहीं हैं। वर्तमान में जिला अस्पताल के एक कमरे में आयुष विंग का अस्पताल संचालित हो रहा है। उसमें आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथ में से सिर्फ आयुर्वेद के ही चिकित्सक की तैनाती है।
आयुर्वेदिक एवं यूनानी पद्धति से मरीजों को बेहतर इलाज कराने के लिए संयुक्त जिला चिकित्सालय में एक कमरे में आयुष विंग का संचालन शुरू किया गया। बीते तीन वर्षों से डॉक्टर, फार्मासिस्ट व अन्य कर्मी अपने निजी भवन के इंतजार में है। इंतजार की घड़िया समाप्त भी हो जाती, पर जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते भवन बनकर तैयार होने के बाद भी उसमें इलाज शुरू नहीं हो सका। भवन बगैर हैंडओवर व साज सज्जा हुए ही 15 अक्तूबर 2016 को कपिलवस्तु में सिद्धार्थ यूनिवर्सिटी के लोकार्पण कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के हाथों लोकार्पण भी करा दिया गया। इसके बाद भी यह महज शोपीश बना हुआ है।
एक वर्ष पूर्व तत्कालीन सीएमओ डॉ. वेद प्रकाश शर्मा ने इस भवन को अस्थायी स्टोर बना दिया। विभागीय जानकार बताते हैं कि संचालन की दिशा में संसाधनों की उपलब्धता न होना प्रमुख कारण है। कार्यदायी संस्था की ओर से लापरवाही बरती जा रही है। लिहाजा संयुक्त जिला चिकित्सालय की मुख्य चिकित्सका अधीक्षक भी भवन को हैंडओवर नहीं ले रही हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. आरके मिश्रा ने बताया कि मामले की छानबीन कराकर आयुष विंग का संचालन उसके भवन में ही कराने का प्रयास किया जाएगा। वहीं निर्माण एजेंसी ग्रामीण अभियंत्रण सेवा के अधिशासी अभियंता एसएस उपाध्याय ने बताया कि संबंधित अवर अभियंता से इस बारे में जानकारी लेकर आवश्यक कदम उठाएंगे।