सिद्धार्थनगर। यूपी और उत्तराखंड के सीएम, केंद्रीय मंत्री और राज्यपाल रह चुके एनडी तिवारी ने ही विकास को गति देने के लिए 1988 में जिले का सृजन किया था। उनके निधन से जनपद के लोग शोकाकुल हैं।
बस्ती जनपद से अलग कर 29 दिसंबर 1988 को मुख्यालय के सिहेंश्वरी इंटर कॉलेज के मैदान में तत्कालीन सीएम नारायण दत्त तिवारी आए तो थे उद्घाटन करने, लेकिन साथ में वे जिलाधिकारी के रूप में हौसला प्रसाद वर्मा और पुलिस अधीक्षक दिलीप त्रिवेदी को भी लाए थे। यह बात अलग है कि एसपी केवल एक दिन ही रह सके। जनपद सृजन के साथ ही उन्होंने टाउन एरिया तेतरी बाजार को उच्चीकृत करते हुए नगर पालिका परिषद में तब्दील करने की घोषणा की थी। जिसका अमल भी हुआ। पूरे विश्व को शांति, अहिंसा व करुणा का संदेश देने वाले भगवान बुद्ध की धरती कपिलवस्तु को विश्व मानचित्र पर स्थापित करने के लिए ही उन्होंने जनपद का नाम भी भगवान बुद्ध के बचपन के नाम सिद्धार्थ से ही जोड़कर रखा।
बांसी-डुमरियागंज के झगड़े में नौगढ़ बना मुख्यालय
जनपद मुख्यालय को लेकर बांसी व डुमरियागंज क्षेत्र के तत्कालीन जनप्रतिनिधियों व नागरिकों ने संघर्ष छेड़ रखा था। आंदोलन को करीब से जानने वाले नजीर मलिक के मुताबिक इसी बीच सदर क्षेत्र से भाजपा विधायक रहे स्व. धनराज यादव, उत्तरापथ नामक अखबार के माध्यम से नौगढ़ को जिला बनाने की आवाज उठाने वाले स्व. रामशंकर मिश्र ने दोनों कस्बों में रेलवे लाइन के साथ ही बस्ती से दूरी कम होने का हवाला देते हुए नौगढ़ को मुख्यालय बनाने की मजबूती से दलील रखी। वे इसमें सफल रहे।
विपक्ष के विधायक को मंच पर बुलाया
उद्घाटन के दौरान मंच पर एनडी तिवारी ने क्षेत्र के भाजपा विधायक धनराज यादव को मंच पर बुलाया तो सभी चौंक गए। हुआ यूं कि सीएम के कार्यक्रम में क्षेत्रीय विधायक को सूचना देने के साथ ही मंच पर उपस्थिति का उल्लेख था, पर सत्तापक्ष से जुड़े स्थानीय कांग्रेसी ऐसा नहीं चाहते थे। बावजूद इसके सीएम तिवारी ने उन्हें तरजीह दी।
विपक्ष के विधायकों को भी सम्मान देते थे एनडी
सिद्धार्थनगर। पूर्व सीएम नारायण दत्त तिवारी के निधन पर राजनीति से जुड़े लोगों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। सभी ने उन्हें एक कुशल, तेजस्वी राजनीतिज्ञ बताते हुए विकास के मुद्दे पर पक्ष-विपक्ष में भेदभाव न करने वाला नेता बताया। डुमरियागंज से भाजपा सांसद व जनपद के सृजन के समय एनडी तिवारी के मंत्रिमंडल में शामिल रहे जगदंबिका पाल ने तिवारी के निधन अपूरणीय क्षति बताते हुए कहा कि जनपद का उद्घाटन कर उन्होंने विकास को एक नई दिशा देने का काम किया। कपिलवस्तु के पहचान को बढ़ाने की शुरूआत की। वह एक कुशल राजनीतिज्ञ, प्रशासक के रूप में जाने जाते थे। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष व तत्कालीन विधायक रहे माता प्रसाद पांडेय ने हार्दिक संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि उनके निधन से निश्चय ही राजनीति में एक कुशल शिल्पीकार का मिल पाना कठिन होगा। विपक्ष के विधायकों को भी सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधि से कम तरजीह नहीं देते थे। जनपद बनने से पहले बस्ती में तत्कालीन डीएम डीडी शर्मा से जुड़े प्रसंग पर बताया कि सत्तापक्ष की ओर से शिकायत हुई थी, इस बीच वे विधानसभा में मिल गए और डीएम के बारे में जानकारी ली। जिस पर मैंने कहा कि डीएम ठीक हैं। इसके बाद उन्होंने शिकायतकर्ताओं को फटकारा। कहा, मेरी अगुवाई में वर्ष 2002-07 के बीच विधानसभा की ओर से उन्हें सम्मान भी दिया गया था। जनपद उद्घाटन के साक्षी रहे डुमरियागंज के विधायक व पूर्व मंत्री मलिक कमाल युसूफ भी उनके निधन पर शोक जताया है। उन्होंने कहा कि बगैर किताब के ही जवाब देने वाले सीएम अब नहीं मिलेंगे। जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष व जनपद बनाओ संघर्ष समिति के सदस्य मुहम्मद सईद भ्रमर ने भी उनके निधन को अपूरणीय क्षति बताया और कहा कि सीएम, राज्यपाल, केंद्रीय मंत्री के रूप में उन्होंने विकास के साथ सामाजिक सौहार्द के संवाहक भी थे।