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घरो में बाढ़ का पानी, बांधों पर गुजर रही रातें

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इटवा (सिद्धार्थनगर)। बाढ़ प्रभावित गांवों से पानी हटने के बावजूद ग्रामीण अभी भी बांधों पर शरण लिए हुए हैं। कच्चे व फूस के मकान गिरने से कुछ ग्रामीण मजबूरी में बांध पर रात गुजार रहे हैं। वहीं कुछ के घरों में अभी भी पानी के कारण नमी है। दिन भर गांव में गुजारने के बाद रात को बांध की राह पकड़ ले रहे हैं। जहरीले जीवों से खतरा बना हुआ है।
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तहसील क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांवों में ग्रामीण रात बांध और खुले में बिता रहे है। ग्राम खखरा व चेचराफ खुर्द गांव में अभी भी रात को लोग घर में नहीं रुक रहे। घरों में नमी के कारण लोग भयभीत हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नमी के कारण सांप, बिच्छू बाहर निकलते हैं। कभी भी कोई अनहोनी हो सकती है। बाढ़ के पानी में फूस के मकान गिरने से कई परिवार बांध पर विस्थापित हो गए हैं। ग्रामीण कहते हैं कि अगर बांध नहीं होता तो लोगों को रातें काटने के लिए तिरपाल के अस्थायी आवास भी नहीं बना सकते थे। बाढ़ के समय ऊंचे स्थान की तलाश में बांध पर ठौर मिला था। तभी से लोगों ने तिरपाल तान कर अस्थायी घर बना लिया है। पानी खिसकने के बाद लोगों की मजबूरी खत्म होने का नाम नहीं ले रही।
गांव निवासी सोखा, रामकुमार, संतोषी, मोलहू, मुनेश्वर, प्रहलाद, केवल, मूसे, चीनक, संवारे, महंगू, रामदत्त, फूला देवी, कंचन, गीता देवी, बिचारी आदि का परिवार आज भी बांध पर रात गुजार रहा है। मांग करते हैं कि आवास के लिए धन देने के साथ बाढ़ के उच्चतम बिंदु तक नींव डालने के साथ मिट्टी पाटने के लिए अतिरिक्त धन मुहैया कराया जाए। तभी लोगों को बाढ़ की विभीषिका से निजात मिलेगी।
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