श्रावस्ती। कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के चलते लॉकडाउन पर गैर प्रांतों में कमाने गए लोग हुजूम में घर लौट रहे हैं। रास्ते में इन परदेसियों की जांच न होने से जिले में दहशत का माहौल है। लेकिन लौटने वाले लोग जो कहानियां बयां कर रहे हैं वह हृदय विदारक है। आने वाले लोग कहीं पिकअप से तो कहीं डीसीएम से अपने गांव पहुंच रहे हैं। सीमा क्षेत्रों में बनाए गए चेकपोस्टों के आंकड़ों पर गौर करे तो शनिवार देर शाम से लेकर रविवार सुबह 11 बजे तक 1002 लोग मात्र तीन चेकपोस्टों से जिले में दाखिल हुए हैं जबकि जिले में कुल 16 चेकपोस्ट हैं।
कोरोना जैसी वैश्विक महामारी में नगरीय क्षेत्रों की असंवेदनशीलता भी लोगों की मुसीबतें बढ़ा रही है। अपना गांव छोड़ कर महानगरों में लोगों की सेवा करने वाले लोग इस महामारी के चलते भगाए जा रहे हैं। यही नहीं किसी के जेब में खाने का पैसा है तो कोई बिना पैसों के पैदल यात्रा करके पहुंच रहा है। ऐसे ही कई दर्द भरी कहानियां रविवार को लोगों ने सुनाईं तो उनकी आंखें डबा-डबा गईं। वहीं सुनने वाले का हृदय कांप उठता था।
दिल्ली से निकले लोग जहां निर्धारित किराए से दोगुना देकर कुछ दूरी की यात्रा किया। पुलिस की लाठियां खाई फिर मीलों पैदल चल कर घर पहुंचे। वहीं दूसरी ओर जिले के लोगों की मुसीबते बढ़ गईं हैं। आने वाले इन लोगों की रास्ते में जांच नहीं हो पा रही है, यह लोग सीधे अपने घर पहुंच रहे हैं। ऐसे में ग्रामीणों के अंदर भय है कि कहीं यह लोग अपने साथ परदेश से संक्रमण न ले आए जिससे पूरा गांव ही समाप्त हो जाए।
तीन चेक पोस्ट से ही 1002 लोग हुए दाखिल
दल्ली, पंजाब, मुंबई, हरियाणा, लखनऊ व कानपुर सहित अन्य नगरों से शनिवार देर शाम से लेकर रविवार 11 बजे तक कुल 1002 लोग जिले में दाखिल हुए हैं। यह आंकड़ा केवल तीन चेकपोस्ट का है। जिले में कुल सोलह चेकपोस्ट बनाए गए हैं। जिले के तीन चेकपोस्ट से दाखिल होने वालों में तुलसीपुर चेकपोस्ट पर दिल्ली से 152, कानपुर से 15, मुंबई से 3, रत्नापुर चेकपोस्ट से कुल 632 लोग दाखिल हुए इसमें दिल्ली से 500, मुंबई से 50, लखनऊ से 20, कानपुर 62 लोग आए हैं। इसी प्रकार कटरा चेक पोस्ट से 200 आदमी दिल्ली व करनाल से आए थे। यह वहां फैक्ट्रियों में मजदूरी करते थे। फैक्ट्री मालिक ने बस की व्यवस्था करके इन्हें भेजा था।
सत्तर किलोमीटर पैदल चले, लाठियां भी खाईं
तुलसीपुर। अपना घर छोड़ गैर नगरों में रोजी की तलाश करने वालों को यह दिन कभी नहीं भूलेगा। जब अपने घर पहुंचने के लिए 70 किलोमीटर पैदल चले। किराए से तीन गुना भाड़ा दिया। नगर में घुसे तो पुलिस ने लाठियों से पीटा। रास्ते में केवल पानी ही उनके जीवन का सहारा रहा। यह सारा दर्द मल्हीपुर थाना क्षेत्र के सोनपुर कला निवासी आठ लोगों ने झेला। सोनपुर निवासी पेशकार, बंशीलाल, संतोष कुमार, अनिल कुमार, रामअचल, मनमोहन, निरंजन भार्गव, अंबर लाल बताते हैं कि यह सभी दिल्ली में गाजीपुर सब्जी मंडी में पल्लेदार का काम करते थे। शनिवार तड़के ही इन्हें स्थानीय लोगों ने दिल्ली छोड़ कर भाग जाने को कहा। वहां से भयभीत होकर वह सीधे सुबह 11बजे दिल्ली के आनंद बिहार बस स्टैंड पहुंचे। वहां दिन भर इंतजार के बाद साधन नहीं मिला। शाम को उन्हें एक रोडवेज बस मिली। जिस पर सवार होकर वह बरेली पहुंचे। यहां तक का किराया उनसे 333 रुपये वसूला गया। बरेली में बस ने उतार दिया। सभी दूसरे साधन का इंतजार कर ही रहे थे कि पुलिस की गाड़ी आ गई। आठ लोगों को देख पुलिन बिना कुछ पूछे उन पर लाठियां बरसाने लगी। पुलिस से भयभीत सभी रात दस बजे बरेली से दस किलोमीटर बाहर पैदल पहुंचे तो उन्हें शहर से बाहर एक ट्रक मिला। जो रात दो बजे 113 रुपये लेकर सीतापुर पहुंचाया। यहां भी वह हाइवे पर उतरे ही थे कि पुलिस की वाहन पहुंच गई। इस दौरान पुलिस ने यहां भी पीटना शुरू कर दिया। पुलिस ने कहा कि यहां से तत्काल निकल जाओ। इस दौरान न तो इन लोगों की जांच हुई। न ही इनकी ओर मदद के लिए किसी ने हाथ ही बढ़ाया। यहां से सभी पैदल निकल लिए। साठ किलोमीटर दिन रात चलने के बाद सभी सोनवा के तुलसीपुर चेकपोस्ट पर पहुंचे। तब तक सभी के पैरों के अंगूठे फट चुके थे। हालांकि यहां चेक पोस्ट पर मौजूद पुलिस व स्वास्थ्य टीम ने सभी की थर्मल जांच कर घर में ही क्वारंटीन रहने की सलाह देकर भेज दिया।
एक डीसीएम में 62 यात्री, तीन हजार रुपये प्रति व्यक्ति का भाड़ा
कोरोना वायरस के कारण लाकडाउन के चलते अपने घर पहुंचने वालों की दास्तान एक से बढ़ कर एक है। कोई सैकड़ों मील पैदल चल कर पहुंच रहा है तो कोई भूखे पेट पुलिस की लाठियां खाकर। लेकिन जमुनहा के भवनियापुर के मजरा जमुनहा में कुछ लोग तीन हजार रुपये प्रति व्यक्ति देकर मुंबई से जमुनहा पहुंचे। सभी जिस डीसीएम पर सवार थे। उसकी दास्ता और भी भयावह है। डीसीएम पर सवार जमुनहा निवासी नफीस अली महाराष्ट्र के थाना बीपी रोड, जिला मौलाना आजाद रोड, महाराष्ट्र में मार्बल लोडिंग व अनलोडिंग की मजदूरी करता था। वह वहां 500 रुपये लगभग कमा लेता था। लाकडाउन के चलते जब सबकुछ बंद हो गया तो वह भूखों मरने लगा। जेब में मात्र चार हजार रुपये थे। तभी पता चला कि बहराइच के नवाबगंज के लिए एक डीसीएम जा रही है। जब उसने डीसीएम चालक से संपर्क किया तो उसने तीन हजार रुपये किराया बताया। मरता क्या न करता। वह तीन हजार रुपये देकर जब डीसीएम पर सवार होने पहुंचा तो पता चला कि वह अकेला नहीं है। उसके साथ जमुनहा क्षेत्र के करीब 62 यात्री है। डीसीएम में न तो बैठने की जगह थी और न ही खाने पीने की कोई व्यवस्था। बस मवेशी की तरह सभी बैठा दिए गए। डीसीएम को तिरपाल से चारों तरफ से बांध दिया गया जैसे कोई सामान भरा हो। चार दिन डीसीएम अपनी सुविधानुसार चलता रहा। इस दौरान एक जगह उन्हें शौच के लिए उतरने दिया गया। रास्ते में बिस्किट व पानी उनका सहारा बना। चौथे दिन सुबह सात बजे बहराइच कस्टम ने रोकलिया। वहीं पर सभी 62 लोगों की जांच हुई। वहां से उनका भाई उन्हें लेकर जमुनहा पहुंचा।
बिना जांच के ही घर पहुंच रहे प्रवासी
जमुनहा(श्रावस्ती)। दिल्ली से भगदड़ की स्थिति बनी हुई है। 22 लोग रविवार सुबह पिकअप पर सवार होकर बरेली से रुपईडीहा पहुंचे। यह सभी लोग दिल्ली से बरेली तक बस से निकले थे। आगे की सवारी न मिलने पर उन्होंने इस साधन का सहारा लिया। इस पिकप पर सवार जमुनहा भवनियापुर के मजरा द्वारिका गांव निवासी शिवराज वर्मा का कहना है कि दिल्ली से बरेली तक का उनसे 353 रुपये वसूला गया। रास्ते में कहीं कोई जांच नहीं हुई। पिकप पर सवार 21 लोग रुपईडीहा के थे। वह अकेला मल्हीपुर का था। घर पहुंचने पर परिवारीजनों ने ही स्वास्थ्य टीम ने उसके आने की जानकारी दिया। इस जानकारी के बाद उसकी जांच हो रही है।
मीलों चल रहे पैदल
इसरार, जीतेन्द्र, हीरालाल, बीती रात्रि दिल्ली से बहराइच तक बस से आए। लगभग 70 किलोमीटर दूर अपने गांव बलरामपुर के ग्राम मथुरा बाजार को पैदल ही चल दिये, वही अनीश ,नफीश, अहमद जब्बार, धुसाह चौराहे से सीतापुर के धौरहरा को पैदल ही निकल पड़े तो लखनऊ के डालीगंज बाजार में लइया चना लगाने वाले शिवकुमार बीती रात्रि बस से बहराइच आये और वहां से करीब 50 किमी दूर ग्राम सोनपुर इकौना के लिए अपने पत्नी व तीन छोटे छोटे बच्चों के साथ पैदल ही निकल पड़े। ऐसे सैकड़ों लोग सड़क पर पैदल ही अपने गांव की ओर दिन भर जाते देखे गए।
भिनगा पहुंची निजी बस तो पुलिस ने पहुंचाया अस्पताल
गैर प्रांतों से वापस लौट रहे लोगों से भरी एक निजी बस रविवार सुबह भिनगा ईदगाह तिराहे पर पहुंची। बस पर लगभग सत्तर लौग मौजूद थे। इनमें से अधिकांश न तो मास्क लगाए थे और न ही सैनिटाइज की व्यवस्था थी। इस पर कस्बा चौकी प्रभारी राजकुमार पांडे ने बस को संयुक्त जिला चिकित्सालय पहुंचाया। जहां सभी की थर्मल जांच की जा रही है।
संयुक्त जिला चिकित्सालय में कुल 15 व कस्तूरबा विद्यालय में 11 लोगों को केवल हास्पिटल क्वारंटीन किया गया है। बाकी लोगों को होम क्वारंटीन की सलाह दी गई है। इसके साथ ही भंगहा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को अपग्रेड करते हुए तीस बेड का अस्पताल बनाया जा रहा है। जिसके कोविड 19 हास्पिटल लेविल वन के नाम से जाना जाएगा।
डा. एपी भार्गव सीएमओ