गिलौला (श्रावस्ती)। बेसिक शिक्षा विभाग ने कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों का नजदीकी परिषदीय विद्यालय में विलय कर दिया है। गिलौला क्षेत्र के कुल 14 विद्यालयों का विलय किया जा चुका है। इनमें प्राथमिक विद्यालय शिवबालक पुरवा का उच्च प्राथमिक विद्यालय रेंड़गंवा में विलय किया गया है। अब यहां के छात्रों को सरयू नहर पार करके पढ़ाई करने के लिए करीब ढाई से तीन किलोमीटर की दूरी तय करनी होगी।
प्राथमिक विद्यालय शिवबालक पुरवा में बीते शिक्षा सत्र में 43 तो वर्तमान शिक्षा सत्र में 57 छात्रों का नामांकन किया गया है। इस विद्यालय का उच्च प्राथमिक विद्यालय रेंड़गवां में विलय होने के बाद मात्र 18 छात्रों की उपस्थिति दर्ज हुई है। कारण है कि प्राथमिक विद्यालय शिवबालक पुरवा व उच्च प्राथमिक विद्यालय रेंड़गवां के बीच सरयू नहर बहती है। ऐसे में छात्रों को विद्यालय तक पहुंचने के लिए नहर की पटरी पर करीब एक से डेढ़ किलोमीटर पैदल सफर तय करने के बाद उन्हें नहर पुल से होकर वापस टू-लेन मार्ग से विद्यालय तक पहुंचना पड़ता है। ऐसे में अभिभावक बच्चों को विद्यालय भेजने से कतरा रहे हैं।
केस: एक
अब विद्यालय नहीं जाते बच्चे
ग्राम शिवबालक पुरवा निवासी ननकू ने बताया कि उनके घर के दो बच्चे प्राथमिक विद्यालय शिवबालक पुरवा में पढ़ते थे। किंतु विद्यालय के बंद होने से अब बच्चों के लिए समस्या हो गई है। नहर पटरी से गुजरते समय कोई भी हादसा हो सकता है।
केस: दो
नहर की पटरी से होकर जाना पड़ता है विद्यालय
शिवबालक पुरवा निवासी बिन्नू देवी ने कहा कि उन्होंने अपने दो बच्चों का नाम कक्षा एक में लिखाया था। वहीं कुछ दिन बाद ही विद्यालय बंद हो जाने से छोटे बच्चों को नहर की पटरी से होकर भेजना मंजूर नहीं है। गांव में ही ट्यूशन से पढ़ाई कर रहे हैं।
केस: तीन
विद्यालय जाने में ही थक जाते हैं बच्चे
शिवबालक पुरवा निवासी रमेश शर्मा ने कहा कि उसके दो बच्चों का विद्यालय में दाखिला है। इसमें से पुत्री प्रज्ञा कक्षा तीन की छात्रा है जो एक दिन विद्यालय जाती है और दूसरे दिन थकान के कारण विद्यालय नहीं जा पाती है। वहीं पुत्र आयुष कक्षा एक का छात्र है, जिसे अब विद्यालय नहीं भेजा जा रहा है।
केस: चार
विद्यालय भेजने से लगता है डर
शिवबालक पुरवा निवासी शीलम ने बताया कि उसके दो बच्चे विद्यालय में पढ़ते हैं। वहीं जब से विद्यालय बंद हुआ है तब से उन्हें तीन किलोमीटर दूर विद्यालय भेजने में डर लगता है। क्योंकि रास्ते में बड़ी नहर व बाईपास मार्ग पड़ता है, जहां कभी भी कोई दुर्घटना हो सकती है।
घर-घर जाकर बच्चों को विद्यालय भेजने के लिए अभिभावकों को समझाया जा रहा है। धीरे-धीरे सब कुछ सामान्य हो जाएगा। अभिभावकों को चाहिए कि बच्चों को विद्यालय भेजें।
- अखिलेश कुमार, खंड शिक्षा अधिकारी गिलौला