कटरा। दिगंबर जैन मंदिर श्रावस्ती में आचार्य वसुनंदी मुनिराज की अध्यक्षता में रविवार को जलाभिषेक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान देश व विदेश से आए अनुयायियों को आचार्य ने उपदेश दिया।
जलाभिषेक के दौरान भगवान संभव नाथ की जैन मुनि व अनुयायियों ने विधि-विधान से पूजा की। इसके बाद आचार्य वसुनंदी मुनिराज ने कहा कि यहां भगवान संभव नाथ ने जन्म लिया था। इसलिए यह धरती नमन योग्य है। यहां के कण-कण में भगवान संभव नाथ के चरण रज विद्यमान हैं।
उन्होंने आगे कहा कि मुक्ति महल में प्रवेश करने का मुख्य द्वार आचार है। सभी मानवों में ज्ञानी मानव श्रेष्ठ होता है। सभी ज्ञानियों में आचारवान श्रमण श्रेष्ठ होता है। विचार की जन्मभूमि आचार है। राष्ट्र, समाज एवं व्यक्ति के सर्वांगीण उन्नति का मूल आधार आचार है। सदाचार एक ऐसा सार्वभौमिक तत्व है, जिसे देश व काल की सीमा में बांधा नहीं जा सकता है।
दिगंबर जैन मंदिर श्रावस्ती के अध्यक्ष संजीव कुमार जैन ने कहा कि आचार्य मुनिराज श्रवण परंपरा के वह नक्षत्र हैं, जो सदैव धरा को प्रकाशित कर रहे हैं। इस दौरान जयपुर के राजेंद्र जैन व महेंद्र जैन ने भी लोगों को संबोधित किया।
इस मौके पर नेपाल राष्ट्र सहित गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली, बिहार, उत्तराखंड, उत्तरांचल व राजस्थान आदि स्थानों से जैन धर्म अनुयायियों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में राहुल जैन, पवन जैन, सुनील जैन, सुरेंद्र जैन सहित अन्य मौजूद रहे।