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चुनाव में लकड़ी का पुल नहीं बन सका मुद्दा

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ककरा घाट पर ग्रामीणों ने लकड़ी बल्ली व खरफूस से बनाया अस्थाई पुल - फोटो : SRAWASTI
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श्रावस्ती। विधानसभा चुनाव जाति धर्म व राशन किट तक सिमट कर रह गया। क्षेत्र के विकास का मुद्दा गौड़ रहा। इसीलिए ककरा घाट पर बना बांस बल्ली व लकड़ी का पुल प्रत्याशियों के मुद्दे में शामिल न हो सका। आज ग्रामीण अपने आप को ठगा हुआ, खाली हाथ मानकर निराश महसूस कर रहे हैं।
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चुनाव जब भी आता है तो कई मुद्दों को लेकर आता है। इन मुद्दों पर चुनावी समर में खड़े प्रत्याशी आश्वासन दते हैं। इस आश्वासन के बाद आम जनता पूरे पांच वर्ष आश्वासन पूरा करने का दबाव अपने क्षेत्रीय विधायक पर बनाए रखती है। इस दौरान कुछ मुद्दे हल भी हो जाते हैं। लेकिन मौजूदा समय में हुआ विधानसभा चुनाव जिले में मुद्दा विहीन रहा। चुनाव जाति, धर्म, राशन किट या फिर वोटकटवा के बीच ही उलझ कर रहा गया। जिसके चलते क्षेत्र के विकास का मुद्दा उठ ही न सका। ऐसा ही एक मुद्दा श्रावस्ती विधानसभा क्षेत्र के ककरा घाट पुल का है। यह पुल विगत कई वर्षों से लोगों के लिए समस्या बना हुआ है। ग्रामीण प्रतिवर्ष इस स्थान पर लकड़ी व बांस से पुल बनाते हैं। और प्रतिवर्ष आई बाढ़ में यह बह जाता है।
स्थानीय ग्रामीणों की माने तो राप्ती नदी के कारण श्रावस्ती के ककरा घाट से मलौना खसियारी, बसंतापुर, सिरसा, भोलवा तमाही, नारायण जोत, सेमरी चकपिहानी व मनोहरापुर सहित करीब 26 गांवों के करीब एक लाख लोगों का आना जाना होता है। नदी पर पुल बनाने की मांग करीब 30 वर्ष पुरानी है। हर मंच पर यह मुद्दा उठा। माननीयों और हुक्मरानों ने आश्वासन दिया लेकिन बात आगे नहीं बढ़ी। ऐसे में ककरा घाट के आसपास रहने वाले ग्रामीणों ने खुद ही पहल की। ग्रामीणों ने चंदा से पैसा जुटाया और बांस, बल्ली, खर फूस से 15 दिन में अस्थायी पुल बना डाला। ग्रामीणों की माने तो इसमें पचास से साठ लोगों का सहयोग मिला।
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यह पुल केवल ग्रामीणों के आने-जाने का रास्ता सुगम नहीं करता। बल्कि इस विधानसभा चुनाव में बड़े-बड़े वाहनों पर बैठकर फर्राटा भरने वाले प्रत्याशियों के प्रचार में भी इस अस्थाई पुल का सहयोग मिला। जहां प्रत्याशी पहुंच नहीं सकते थे। वहां इस पुल के रास्ते ने आसान कर दिया। पोलिंग पाटियां भी इस अस्थाई पुल का इस्तेमाल करके अपने गंतव्य तक पहुंचीं। लेकिन पूरे चुनाव में यह पुल चुनावी मुद्दा नहीं बना। किसी भी प्रत्याशी ने इसके लिए न तो आश्वासन दिया और न ही ऐसा कुछ किया जिससे ग्रामीणों को विश्वास हो जाए कि भविष्य में इस लकड़ी के अस्थाई पुल के स्थान पर स्थाई पुल का निर्माण होगा। इससे क्षेत्र के ग्रामीणों में निराशा है।
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