जेतवन परिसर में मौजूद वियतनाम से आए अनुयायी। -संवाद
कटरा। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती मंगलवार को वियतनाम से आए 40 अनुयायियों से गुलजार रही। सभी ने रीति रिवाज से बोधि वृक्ष व जेतवन परिसर में अर्चना की। इसके बाद विपश्यना ध्यान केंद्र पर ध्यान लगाया और विपश्यना ध्यान संबंधी फायदे आदि की जानकारी ली।
विपश्यना शिक्षक गोपाल शरण सिंह ने अनुयायियों को बताया कि हीनयान का अर्थ है संकुचित मार्ग और महायान का अर्थ श्रेष्ठ मार्ग है। जब गौतम बुद्ध निर्वाण के लिए निकले थे, तो उन्होंने अपने शिष्यों को बुलाकर उनका मार्ग खुद तलाशने की बात कही थी, लेकिन इस बात का अर्थ दोनों संप्रदायों ने अलग-अलग निकाला।
हीनयान संप्रदाय, जो आज परंपरावादी बौद्ध हैं, ने इस बात का अर्थ लगाया कि गौतम बुद्ध ने बुद्धत्व प्राप्त करने की बात कही है। वहीं, महायान संप्रदाय ने इसे एक संकुचित सोच और लक्ष्य बताया।
महायान ने बोधिसत्व को अपना लक्ष्य बनाया, जिसका आधार करुणा, दया और समाज कल्याण है। उनका मानना है कि गौतम बुद्ध अलग-अलग अवतार में तब तक जन्म लेते रहेंगे, जब तक समस्त जगत का कल्याण नहीं हो जाएगा।