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विश्वास का अभाव, तलाक के लिए बढ़ रही अर्जी

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श्रावस्ती। पति पत्नी के बीच विश्वास का अभाव दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। यही कारण है कि कुटुंब न्यायालय पर तलाक की अर्जी बढ़ती जा रही है। यही नहीं दोनों के बीच तनाव कुछ इस कदर हो जाता है कि न्यायालयों पर होने वाली काउंसलिंग का असर भी दोनों पर नहीं पड़ रहा है। शिक्षा का दायरा बढ़ता जा रहा है। इसके बावजूद पति पत्नी शिक्षित होते हुए भी छोटे छोटे मामले को इस स्तर तक ले आते हैं कि उसे निपटाने में न्यायालय में वर्षों का समय लग जाता है। कभी कपड़े धोने को लेकर होता है या फिर पति के मनमाफिक खाना न बनाने, पत्नी को मनचाहा सामान न दिलाने के लिए जैसे मामले भी हो सकते हैं।
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इन सबका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि श्रावस्ती की जनसंख्या मात्र बारह लाख है। वहां कुटुंब न्यायालय पर हजारों मामले तलाक, भरण पोषण, बेदखली के विचाराधीन है। इन मामलों की संख्या बढ़ती जा रही है। ऐसे मामलों में पुलिस व न्यायालय दोनों का रुख है कि जहां तक हो सके वहां तक सुलह समझौते के आधार पर पति पत्नी के संबंधों को फिर से ढर्रे पर लाया जा सके। लेकिन अधिकांश कुटुंब इसको मानने के लिए तैयार नहीं होते। वर्ष 2020 में कुटुंब न्यायालय में दायर फौजदारी वाद जिसके अंतर्गत पति पत्नी के बीच मारपीट सहित अन्य मामले आते हैं, इनकी संख्या 880 है।
वहीं सिविल वाद जिसमें तलाक व रुख्सती के मामले आते हैं वह 788 है, कुल 1668 मामले। ये आंकड़े 31 दिसंबर 2020 तक हैं। एक जनवरी 2021 से लेकर 31 अक्टूबर 2021 तक तलाक सहित अन्य मामलों की संख्या बढ़ कर 806 हो गई। जबकि क्रिमिनल वाद की संख्या 837 हो गई। ऐसे में देखा जाए तो 31 अक्टूबर तक ही कुटुंब न्यायालय पर 1643 मामले विचराधीन हो गए थे। यदि एक अक्टूबर 2021 तक एक वर्ष के मामलों को देखे तो कुटुंब न्यायालय में सिविल नेचर के 414 व क्रिमिनल नेचर के 281 मामले नए दायर हुए। सामाजिक कार्यकर्ता व पुलिस परामर्श केंद्र की काउंसलर इंदू ने बताया कि पारिवारिक मामलों में काउंसलिंग के दौरान अक्सर देखा गया है कि विवाद का कारण दोनों पक्षों का अहंकार व उसके कारण होने वाले संवादहीनता ही है। यदि इसको अलग रख कर पति पत्नी बात करें तो उनके मामले सुलझ सकते है।
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कुटुंब न्यायालय में जितनी तेजी से मामले दायर हुए, उतनी ही तेजी से न्यायालय ने मामलों का निस्तारण भी किया। 31 अक्टूबर 2021 तक न्यायालय ने सिविल नेचर के 432 व क्रिमिनल नेचर के 330 मामलों का निस्तारण किया। दहेज उत्पीड़न के तहत लिखे गए मामलों में न्यायालय पर काउंसलिंग की व्यवस्था है। ताकि यदि पति पत्नी चाहें तो वह सुलह समझौता करके बिना मुकदमेबाजी के एक साथ रह सके। लेकिन जिले में इस व्यवस्था का कोई भी असर नहीं हुआ। जितने भी मामले आए उनमें से अधिकांश में दोनों पक्षों ने न्यायालय पर मुकदमा लड़ने व न्यायालय से ही न्याय पाने की बात कही।
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