वीरपुर (श्रावस्ती)। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों का विलय नजदीकी परिषदीय विद्यालय में किया जा रहा है। इकौना क्षेत्र के कुल 13 विद्यालयों का विलय हो चुका है। इनमें प्राथमिक विद्यालय महदेइया खास का प्राथमिक विद्यालय विदुहनी पंडित पुरवा में विलय किया गया है। वहीं, उच्च प्राथमिक विद्यालय श्याम देवरिया का उच्च प्राथमिक विद्यालय दसियापुर में विलय किया गया है। अब यहां पढ़ने वाले बच्चों को नाला पार करते हुए लंबी दूरी तय कर विद्यालय जाना पड़ रहा है।
प्राथमिक विद्यालय महदेइया खास में नामांकित 40 छात्रों को अब प्राथमिक विद्यालय विदुहनी पंडित पुरवा जाना पड़ रहा है। वहीं, कई छात्र दूरी तो कई रास्ते में पड़ने वाले नाले के कारण विद्यालय नहीं पहुंच रहे हैं। प्राथमिक विद्यालय विदुहनी पंडित पुरवा के निकट ही एक नाला है, जो बरसात में उफना जाता है। ऐसे में विद्यालय विलय होने के कारण अभिभावक दुर्घटना की आशंका से बच्चों को विद्यालय भेजने से कतरा रहे हैं। वहीं 25 छात्र संख्या वाले उच्च प्राथमिक विद्यालय श्याम देवरिया को उच्च प्राथमिक विद्यालय दसियापुर में विलय किया गया है। किंतु दूरी अधिक होने के कारण बच्चे विद्यालय जाने से कतरा रहे हैं।
केस: एक
लंबी दूरी नहीं तय कर सकते बच्चे
ग्राम महदेइया निवासी रजी अहमद ने बताया कि गांव के निकट स्थित विद्यालय को बंद कर दिया गया है। ऐसे में अब गांव से करीब तीन किलोमीटर दूर स्थित स्कूल में छोटे-छोटे बच्चों का पैदल पहुंचना संभव नहीं है। इसलिए बच्चे अब घर पर ही रहते हैं।
केस: दो
नाले में गिर सकते हैं बच्चे
ग्राम महदेईया निवासी कन्हैया शुक्ला ने कहा कि विद्यालय जाने के रास्ते में नाला पड़ता है। इसमें बरसात के दिनों में यह पानी से भर जाता है। इससे दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में अब बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया है।
केस: तीन
रास्ते में लगी झाड़ियों से बच्चों को समस्या
ग्राम श्याम देवरिया निवासी देशराज ने बताया कि उनके परिवार के तीन बच्चे विद्यालय जाते थे। किंतु जब से विद्यालय बंद हुआ है तब से बच्चे विद्यालय नहीं जा पा रहे हैं। रास्ते में लगी झाड़ियाें से बच्चों को डर लगता है, इन्हीं के बीच से होकर बच्चों को आना-जाना पड़ता है।
केस: चार
दूरी बढ़ने से नहीं स्कूल नहीं भेज रहे बच्चे
ग्राम मिश्रीपुरवा निवासी आलोक कुमार ने बताया कि विद्यालय मर्जर से दूरी तो बढ़ी ही है, साथ ही बच्चों को नाले पर बने पुल से होकर जाना पड़ता है। इससे उनके नाले में गिरने की आशंका रहती है। अब लगता है कि बच्चों की पढ़ाई बंद हो जाएगी।
विद्यालयों के विलयीकरण में मानकों का पूरा ध्यान रखा गया है। बच्चों को स्कूल तक पहुंचाने के लिए अभिभावकों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। गांवों में जाकर बच्चों को स्कूल भेजने के लिए अभिभावकों को जागरूक किया जा रहा है।
-फूलचंद, खंड शिक्षा अधिकारी इकौना