श्रावस्ती। डीपीआरओ ने 11 पंचायतों के सचिवों को अभिलेख उपलब्ध न कराने पर कारण नोटिस दिया है। वहीं एक सचिव का वेतन रोकने के लिए पत्र भेजा है। ग्राम पंचायतों की ऑडिट में आए लेखा परीक्षकों को ग्राम सचिवों ने अभिलेख नहीं मुहैया नहीं कराए थे। जिसके बाद लेखा परीक्षक ने 11 पंचायतों पर 1.46 करोड़ के घालमेल की रिपोर्ट भेज दी थी।
कुछ दिन पूर्व जिला लेखा परीक्षक ने भौंसावा, मनिकापुर खुर्द, मनोहरापुर, मलौना खसियारी, बेनीडिहवा, पटखौली, बैरिहवा, बुटहर, मल्हीपुर खुर्द, खावां कला व सेहरिया की ऑडिट की थी। जो वित्तीय वर्ष 2018-19 व 2019-20 के लिए थी। ऑडिट के दौरान इन 11 पंचायतों के सचिवों ने लेखा परीक्षक के सामने अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए थे। जिसके चलते लेखा परीक्षक ने अपनी रिपोर्ट में इस वित्तीय वर्ष में इन पंचायतों की ओर से किए गए खर्च 1.46 करोड़ का घपला करार कर दिया था। साथ ही रिपोर्ट उप निदेशक पंचायत देवी पाटन मंडल व डीपीआरओ को भेज दी थी। जिसके बाद डीपीआरओ ने 11 पंचायतों में तैनात सचिवों के विरुद्ध कारण बताओ नोटिस जारी किया है। जबकि मनोहरापुर व मलौना खसियारी में तैनात तत्कालीन सचिव राजेश कुमार चौधरी का वेतन रोकने के लिए बहराइच डीएम को पत्र लिखा है। राजेश की वर्तमान में प्रोन्नति पर बहराइच में ही तैनाती है।
राज्य वित्त के तहत पंचायतों में स्ट्रीट लाइट, सोलर लाइट, कूड़ेदान खरीद, हैंडपंप रिबोर, मरम्मत, नाली निर्माण जैसे कार्य कराए गए थे। इसमें से अधिकतर कार्य वर्क ऑर्डर के जरिए होने थे। जिनका बिल बाउचर, मस्टर रोल, माप पुस्तिका, कैश बुक आदि सचिवों के पास उपलब्ध होना चाहिए था। लेकिन वह उनके पास नहीं था।
स्ट्रीट व सोलर लाइट खरीद में ज्यादा गड़बड़ी मिली है। इसमें आपूर्तिकर्ता ने जिस कंपनी का उत्पाद लगाया है, उसका बिल न देकर स्वयं की फर्त का बिल प्रस्तुत किया है। जबकि बिल कंपनी का ही प्रस्तुत करना चाहिए, ताकि वारंटी अवधि का लाभ मिले।
ऑडिट में जो भी आपत्तियां आई हैं, उसके निस्तारण के लिए सचिवों को पहले ही नोटिस भेजी जा चुकी है। 11 में से नौ पंचायतों ने अपनी आपत्तियों को समाप्त कराने के लिए अभिलेख जमा कर दिया है। तीन पंचायत अभी बचे हैं, जिनका वेतन रोकने का निर्देश जारी किया जा चुका है। आवश्यकता पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
आनंद प्रकाश श्रीवास्तव डीपीआरओ