श्रावस्ती। जिले की बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हो रहा है। बरसात शुरू होने के बाद व्यवस्था में सुधार का दावा किया जा रहा था जबकि स्थिति इसके विपरीत है। चाहे नगर हो या गांव, उपभोक्ताओं को रोस्टर से काफी कम बिजली नसीब हो रही है। जरूरत के वक्त आपूर्ति बाधित होने के कारण लोगों में गुस्सा पनप रहा है। कभी ट्रिपिंग तो कभी तार टूटने की वजह से आपूर्ति बाधित रहती है।
करीब 14 लाख की आबादी वाले इस जिले के लोगों को विद्युत आपूर्ति देने के लिए 13 उपकेंद्र हैं। 38 फीडरों के सहारे एक लाख, 35 हजार उपभोक्ताओं को आपूर्ति दी जाती है। जिम्मेदारी निभाने वाले ज्यादातर अवर अभियंताओं के फोन अक्सर या तो बंद रहते हैं या फिर दूसरी काल पर व्यस्तता के कारण उपभोक्ता घंटों संपर्क नहीं कर पाते हैं। वहीं, शासन की ओर से सभी उपकेंद्रों पर बिजली समस्या के निराकरण के लिए कंट्रोल रूम स्थापित कर एक-एक मोबाइल नंबर भी जारी किया गया था। या तो इन नंबरों पर संपर्क नहीं हो पाता या फिर समस्या सुनने के बाद कंट्रोल रूम पर मौजूद कर्मचारी नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं को कभी अधिभार, कभी ट्रिपिंग, कभी अघोषित कटौती तो कभी मामूली फॉल्ट के कारण घंटों आपूर्ति से वंचित होना पड़ता है।
मुख्यालय भिनगा सहित कलेक्ट्रेट व अन्य सरकारी कार्यालय को 24 घंटे विद्युत आपूर्ति देने का रोस्टर है। इसके विपरीत कलेक्ट्रेट सहित सरकारी कार्यालयों को 20 से 21 घंटे ही आपूर्ति मिल रही है। वहीं, भिनगा नगर के उपभोक्ताओं को 18 घंटे भी आपूर्ति मिलना दूभर है। इकौना व जमुनहा तहसील मुख्यालयों को रोस्टर के 21:30 घंटे के स्थान पर 12 से 14 घंटे ही विद्युत आपूर्ति मिल पा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए जारी 18 घंटे आपूर्ति के रोस्टर के स्थान पर 8 से 10 घंटे भी अबाध आपूर्ति मिल पाना दूभर है।
भीषण गर्मी के कारण फीडरों पर लोड अधिक हो जाता है। इस वजह से ट्रिप कर जाते हैं। इन्हें ठंडा करने के लिए आपूर्ति बाधित करनी पड़ती है। बरसात में कई बार तार टूटकर गिर जाते हैं। इस वजह से दिक्कत होती है। मौसम सामान्य होने पर आपूर्ति सामान्य हो जाएगी। - डीपी सिंह, अधिशाषी अभियंता