श्रावस्ती। हरिहरपुररानी के ग्राम पंचायत पूरेखैरी व टंड़वा बनकटवा के मजरा बगुरइयां सहित आंशिक सिसवा गांव को जोड़ कर बने सिविल लाईन वार्ड में समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। जबकि डीएम सहित जिले के लगभग सभी उच्च अधिकारियों के आवास व कार्यालय इसी वार्ड में पड़ते हैं। जहां पानी, सड़क व जल निकासी का कोई इंतजाम नहीं है। नगर सीमा में शामिल होने से पूर्व यहां के निवासियों को मिलने वाली सुविधाएं भी अब नदारद हैं।
ग्राम पंचायत टंड़वा बनकटवा के बड़केपुरवा व आंशिक वर्गीवर्गा को जोड़ कर अब्दुल कलाम नगर वार्ड बनाया गया था। इसी गांव के लोनियनपुरवा व छोटका पुरवा को जोड़कर कृष्णानगर वार्ड व बनकटवा को दर्जा दिया गया था। वहीं इसी के मजरे मटखनवा में ग्राम पंचायत पूरे खैरी के कुछ हिस्से को जोड़ कर केशवपुरम व दोनों ग्राम पंचायतों के बगुरईयां तथा आंशिक सिसवा को जोड़ कर सिविल लाईन वार्ड का निर्माण किया गया था। इसके बाद से वार्डवासियों में बेहतर विकास व सुविधाएं बढ़ने की उम्मीद जगी थी। जो पांच वर्ष बाद भी पूरी नहीं हुई। इतना ही नहीं पूर्व में मिलने वाली सुविधाएं भी यहां के निवासियों से छिन गई।
सिविल लाइन के बगुरईयां में पांच वर्ष बाद भी न तो एक इंच नाली का निर्माण हुआ और न ही इंटरलाकिंग लगी। वाटर सप्लाई का सपना आज भी अधूरा है। यहां तैनात सफाई कर्मी कभी कभार ही आता है। जगह जगह व्याप्त कीचड़ व जलभराव, आबादी के मध्य लगे कूड़े के ढेर व घूर लोगों की परेशानी बढ़ा रहे हैं। वार्ड वासियों को आज भी ग्रामीण क्षेत्र की विद्युत आपूर्ति दिलाई जा रही है। इतना ही नहीं विद्युत पोलों पर लगी अधिकांश स्ट्रीट लाईटें खराब हो चुकी है। जिसे बदला नहीं जा सका है।
सिविल लाइन निवासी अनंतराम त्रिपाठी बताते हैं कि चुनाव पूर्व वार्ड में विकास की गंगा बहाने का दावा किया गया था। जबकि पांच वर्ष बाद भी गांव में एक इंच नाला भी नहीं बन सका। राकेश तिवारी बताते हैं कि गांव में प्रधानमंत्री आवास के अतिरिक्त किसी को कोई सुविधा नहीं मिली। जबकि जिलास्तरीय सभी अधिकारी इसी वार्ड में रहते हैं। रोहिणी नंदन पांडे कहते हैं कि बगुरईयां के अंदर व बाहर न तो कहीं एक इंच इंटर लाकिंग व सड़क का निर्माण हुआ और न ही नाली का। चुनाव पूर्व जिन विद्युत पोलों पर स्ट्रीट लाईटें लगाई गई थीं, उनमें से ज्यादातर खराब हो चुकी हैं। स्कंद राव पांडे का कहना है कि नगर सीमा में शामिल होने से पहले अच्छा था कि उन्हें गांव स्तर की सुविधा मिल रही थी। अब न तो नगर की सुविधा मिल रही है और न ही गांव की।