श्रावस्ती। निर्माणाधीन कोर्ट का काम पूरा हो गया। रविवार सभी न्यायालयों के कार्यालय व समस्त अभिलेखागार नए भवन में पहुंचा दिए गए। मंगलवार से न्यायालय का संचालन नए भवन में होगा। यह आदेश अध्यक्ष अवस्थापना कमेटी ने दिया है।
जिले में न्यायालय भवन निर्माण के लिए वर्ष 2014 में स्वीकृति मिली थी। सितंबर 2015 में इसका निर्माण प्रारंभ हुआ। दिसंबर 2018 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित था। उस समय निर्माण का बजट 33 करोड़ 68 लाख 70 हजार रुपये शासन ने स्वीकृत किया था। लेकिन न्यायालय निर्माण की गति बहुत धीमी थी। इस बीच अधूरे निर्माण को पूरा कराने के लिए अधिवक्ताओं ने आंदोलन भी किया। न्यायालय भवन निर्माण न होने व लागत बढ़ जाने के कारण वर्ष 2020 में न्यायालय का बजट फिर से पुनरीक्षित किया गया। ऐसे में लागत लगभग दो गुनी हो गई।
इसके बाद भी गति धीमी रही। लेकिन अधिवक्ता व न्यायिक अधिकारियों के रुख को देखते हुए निर्माण इकाई ने कार्य तेज किया। अब आखिरकार दस कोर्ट न्यायालय का निर्माण पूरा हो गया। यही नहीं रविवार को अवकाश होने के बावजूद कर्मचारियों ने न्यायालय का सामान नए भवन में आवंटित कमरों में पहुंचा दिया। इसी के बाद अवस्थापना समिति के अध्यक्ष विशेष न्यायाधीश उमेश कुमार द्वितीय ने आम लोगों के लिए एक पत्र जारी किया है। जिसमें लिखा है कि अब मंगलवार से समस्त न्यायालयों का कार्य नए भवन से संचालित किया जाएगा।
नए न्यायालय में कोर्ट पहुंच गई है। मंगलवार से वहीं से कार्य का संचालन होना है। लेकिन अभी तक मामलों की पैरवी करने वाले अधिवक्ताओं के बैठने की कोई व्यवस्था नहीं हुई है। अभी न्यायालय की ओर से अधिवक्ताओं से अस्थायी चेंबर भूमि आवंटन के लिए आवेदन मांगा गया है। यह आवेदन ईमेल के माध्यम से मांगा गया है। भूमि का आवंटन कब तक होगा या फिर अधिवक्ताओं को बैठने के लिए टीन शेड आदि की व्यवस्था किस स्तर पर होगी। इसके बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में माना जा रहा है कि अधिवक्ता जब तक नए परिसर में स्थापित नहीं होगी तब तक न्यायिक कार्य प्रभावित रहेगा।