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देवी भागवत में माता के 18 स्वरूपों का वर्णन

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कटरा (श्रावस्ती)। कटरा की खरगौरा बस्ती में श्री शतचंडी महायज्ञ एवं श्रीराम कथा का आयोजन किया जा रहा है। समय माता मंदिर भिट्टी में सोमवार को आयोजित कार्यक्रम में अयोध्या धाम से आए कथा वाचक द्वारा शिव-पार्वती की कथा का गुणगान किया गया।
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कथा के दौरान सोमवार को कथा व्यास पंडित श्याम शास्त्री जी महाराज ने कहा कि सती को ही पार्वती, दुर्गा, काली, गौरी, उमा, जगदंबा, गिरिजा, अंबे, शेरोवाली, शैलपुत्री, पहाड़ावाली, चामुंडा, तुलजा, अंबिका आदि नामों से जाना जाता है। इनकी कहानी बहुत ही रहस्यमय है। यह किसी एक जन्म की कहानी नहीं कई जन्मों और कई रूपों की कहानी है। देवी भागवत पुराण में माता के 18 रूपों का वर्णन मिलता है। हालांकि नौ दुर्गा और दस महाविद्याओं (कुल 19) के वर्णन को पढ़कर लगता है कि उनमें से कुछ माता की बहनें थीं और कुछ का संबंध माता के अगले जन्म से है। जैसे पार्वती व कात्यायनी की अगले जन्म की कहानी है तो मां तारा माता की बहन थीं।
माता सती का पहला जन्म सती माता पुराण के अनुसार, भगवान ब्रह्मा के मानस पुत्रों में से एक प्रजापति दक्ष के घर हुआ था। प्रजापति दक्ष की दो पत्नियां थीं प्रसूति और वीरणी। प्रसूति से दक्ष की चौबीस कन्याएं जन्मीं और वीरणी से साठ कन्याएं। इस तरह दक्ष की 84 पुत्रियां और हजारों पुत्र थे। राजा दक्ष की पुत्री सती की माता का नाम था प्रसूति। प्रसूति स्वायंभुव मनु की तीसरी पुत्री थीं। सती ने अपने पिता की इच्छा के विरुद्ध कैलाशपति भोलेनाथ से विवाह किया था। पार्वती-शंकर के दो पुत्र और एक पुत्री हैं। पुत्र गणेश व कार्तिकेय और पुत्री वनलता हैं। जिन एकादश रुद्रों की बात कही जाती है वे सभी ऋषि कश्यप के पुत्र थे। उन्हें शिव का अवतार माना जाता है। इस मौके पर कामता प्रसाद यादव, श्यामता यादव, अनंतराम ,रजत श्रीवास्तव, राज द्विवेदी, तिलकराम, ओमप्रकाश आदि मौजूद रहे।
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