श्रावस्ती। विधानसभा चुनाव में भिनगा विधानसभा सीट पर पुराने पहलवान नए दांव पेंच से जंग लड़ेंगे। यह चुनाव मुद्दा नहीं जाति के भरोसे होगा। सपा प्रत्याशी आने के बाद यह तय होगा कि जनता का रुझान किस और जाएगा। ब्राह्मण वोटर चुनाव में विजयश्री के कर्णधार बन सकते हैं।
विधानसभा चुनाव की घोषणा भले ही पहले हो गई हो लेकिन चुनावी गर्माहट भाजपा प्रत्याशी के मैदान में आने के बाद ही हुई है। भाजपा ने पदमसेन चौधरी पर अपना दांव लगाया है। पदमसेन चौधरी भले ही बहराइच के मैगला गांव के रहने वाले हों। लेकिन उनका इस जिले से राजनीतिक नाता रहा है। यह बात और है कि यह नाता करीब 12 वर्ष पहले का है। जब वह बहराइच लोकसभा सीट से सांसद हुआ करते थे। उस समय भिनगा विधानसभा उनके राजनीतिक क्षेत्र का अंग हुआ करती थी। उनके पिता रुद्र सेन चौधरी बहराइच लोकसभा सीट से तीन बार सांसद रहे तो पदमसेन चौधरी स्वयं दो बार सांसद हुए। लेकिन परिसीमन के बाद नई लोकसभा गठित हुई तो श्रावस्ती के नाम से एक नया क्षेत्र बना। जिसमें बहराइच को अलग करते हुए श्रावस्ती के दो व बलरामपुर के तीन विधानसभा सीटों को जोड़ा गया।
ऐसे ही इकौना विधानसभा क्षेत्र जिसमें उसे समय बहराइच के मौजूदा पयागपुर का अधिकांश हिस्सा लगता था उसे बहराइच से अलग करते हुए श्रावस्ती विधानसभा क्षेत्र बनाते हुए गिलौला व जमुनहा क्षेत्र के कुछ हिस्से को काट कर मिला दिया गया। ऐसे में देखा जाए तो यह वह समय था जब श्रावस्ती पूरी तरह से राजनीतिक व भौगोलिक दोनों तरीके से कट कर बहराइच से अलग हो गई। इसी प्रकार से चौधरी परिवार का वर्चस्व यहां से समाप्त हो गया। लेकिन उनका आना-जाना व्यक्तिगत रूप से बना रहा। इसके बाद होने वाले विधानसभा व लोकसभा चुनाव में उनकी मांग कुर्मी वोटरों को भाजपा कीे ओर मोड़ने के लिए हुई। लेकिन वह दौर और था और अब यह दौर और है। पहले नीति पारदर्शी कार्य प्रणाली व सिद्धांतों की राजनीति थी। तो आज ऐनकेन प्रकारेण पद हासिल करने की राजनीति है। जिसमें कहावत है कि सब जायज है।
ऐसे ही 12 वर्ष बाद राजनीतिक रूप से फिर से भिनगा में चुनाव लड़ना पदमसेन चौधरी के लिए भी कठिन है। लेकिन उनके लिए उनके पुराने वफादार व पार्टी का संगठनात्मक ढांचा उनके इस रोड़े को खत्म करने में थोड़ी आसानी दे सकता है। लेकिन इस रण में भले ही वह पुराने पहलवान हों लेकिन दांव नया आजमाना पड़ेगा। वहीं दूसरी ओर अभी भी भाजपा व बसपा का प्रत्याशी आने के बावजूद वोटर खासतौर से ब्राह्मण वोटर असमंजस की स्थिति में है। वह यह निर्णय नहीं ले पा रहे हैं कि उन्हें किसके साथ जाना चाहिए। सभी वर्ग के लोग इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि सपा भी अपने प्रत्याशी के नाम की घोषणा कर दे। इसके बाद यह तय होगा कि किस पार्टी की क्या स्थिति बनेगी। कौन प्रत्याशी कितना लोकप्रिय है वही इस विधानसभा चुनाव पर इस सीट पर ब्राह्मण वोटर महत्वपूर्ण होंगे। क्यों कि न तो उन्हें सजातीय प्रत्याशी की उम्मीद है और न ही कोई ऐसा सिद्धांत है कि वह किसी की ओर झुके। वह अपना निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र होंगे।
जातीय आंकड़ा 289 भिनगा विधानसभा क्षेत्र
कुल मतदाता - 392650
पुरुष -209846
महिला - 182775
अन्य - 29
जातीय समीकरण
पठान मुसलिम - 79481
पिछड़ा मुसलिम- 38512
ब्राह्मण - 52362
यादव- 52207
कुर्मी - 40635
क्षत्रिय- 13280
निषाद, मल्ल, कश्यप, बिंद - 8625
सैनी, मौर्य, कुशवाहा, शाक्य - 9626