श्रावस्ती/तुलसीपुर। राप्ती की मुख्य धारा में जमी रेत के चलते नदी और घातक हो गई है। किनारों पर बसे गांवों में तेजी से कटान कर रही है। इससे ग्रामीण दहशत में हैं। सबसे ज्यादा कटान घाटेपुरवा व सलारूपुरवा में हो रहा है। 24 घंटे में एक दर्जन से अधिक किसानों के फसल लगे खेत नदी में समा चुके हैं।
जलस्तर घटने के साथ ही राप्ती ने जमुनहा तहसील क्षेत्र में एक बार फिर कहर बरपाना शुरू कर दिया है। सैकड़ों बीघा खेत निगल चुकी राप्ती एक बार फिर वीरपुर गांव में फसल सहित खेतों को काट रही है, इससे पूरा गांव सहमा हुआ है।
वीरपुर निवासी बाबूलाल, आशाराम, फकीरे, देवा महराज, बाबादीन, अमेरिका यादव, ओमकार चौहान, गिरवर प्रसाद, सुंदर लाल, ननकू व दयाराम आदि ने बताया कि उनके खेत राप्ती के मुहाने पर हैं और राप्ती थोड़ा-थोड़ा कर खेतों को धारा में समाहित कर रही है। ग्रामीणों ने बताया कि 24 घंटे में तीन बीघा से अधिक खेत कट चुका है।
वहीं, सलारूपुरवा निवासी सालिकराम, रामलाल यादव, गिरवर प्रसाद, बलदेव, बदलूराम, जमुना प्रसाद, महराजदीन व गंगाराम आदि ने बताया कि उनके खेत घाटेपुरवा गांव के पास हैं, जिन्हें राप्ती तेजी से काट रही है। दो बीघा से अधिक खेत नदी में समा चुके हैं और घाटेपुरवा के अस्तित्व पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
छलका किसानों का दर्द, बोले- भूमिहीन हो गए
कटान को लेकर घाटेपुरवा निवासी किसान बालकराम मौर्य ने बताया कि राप्ती नदी ने उनके सभी खेतों को काटकर उन्हें भूमिहीन बना दिया। वीरपुर निवासी दयाराम ने बताया कि उनका दो बीघा खेत नदी में समाहित हो गया है। ननकू ने बताया कि धान की बोआई की थी कि परिवार का भरण-पोषण होगा, लेकिन नदी धान लगे खेतों को काट रही है। मदद के लिए कोई नहीं आ रहा है।