श्रावस्ती। राजस्व कर्मियों की साठगांठ से सत्यापन रिपोर्ट में हेराफेरी कर पहाड़ी नाले में बालू खनन का पट्टा जारी कर दिया गया। कृषि भूमि पर बाढ़ के दौरान जमा होने वाली बालू हटाने के लिए किसानों को बालू खनन का पट्टा मिलता है। पट्टा आवंटन से पूर्व कृषि विभाग को बालू हटने के बाद कृषि योग्य भूमि तैयार होने का प्रमाण पत्र भी देना होता है। इसी नियम का फायदा उठा कर सिरसिया में शिवगढ़ खुर्द के समीप भैंसाही पहाड़ी नाले की बीच धारा में बालू खनन का पट्टा जारी कर दिया गया।
सिरसिया क्षेत्र सुहेलदेव वन्य अभ्यारण्य से सटा हुआ है। इसलिए यहां दस किलोमीटर की परिधि में पहाड़ी नाले में बालू खनन पट्टा देना पहले से ही प्रतिबंधित हैं। इसके बावजूद नियमों को दर किनार कर सचौली के पास शिवगढ़ खुर्द में एक नाले को कृषि भूमि बता कर चहेतों को बालू हटाने का पट्टा जारी कर दिया गया। सिल्ट सफाई के नाम पर नाले से एक मीटर तक बालू का खनन भी हो चुका है। इसके लिए पट्टा जारी करते समय लगने वाली स्थलीय रिपोर्ट में भी हेराफेरी की गई।
तहसील स्तर से जारी रिपोर्ट में इस बात का कोई जिक्र ही नहीं किया गया कि जिस स्थान का खनन पट्टा मांगा जा रहा है, वह वास्तव में पहाड़ी नाले के धारा के बीच में है। जहां कृषि कार्य नहीं हो सकता। यही नहीं यह क्षेत्र सोहेलवा वन्य जीव अभ्यारण्य से लगभग पांच किलोमीटर की दूरी पर है। इसके बावजूद तहसील व खनन इकाई के कर्मचारियों की साठगांठ से नियम कानून दर किनार कर खनन पट्टा जारी कर दिया गया। इस मामले में खनन अधिकारी राजकुमार संघम कुछ भी गलत नहीं मानते हैं। उनका कहना है कि जिस जगह का पट्टा दिया गया है, वहां बालू हटने के बाद खेती योग्य भूमि तैयार हो जाएगी।