श्रावस्ती। विधान परिषद चुनाव के लिए जोड़ तोड़ शुरू हो गई है। बहराइच के अधिकांश लोग श्रावस्ती का चक्कर लगा रहे हैं। भाजपा में एमएलसी चुनाव लड़ने वालों की संख्या सबसे अधिक है। जबकि दूसरे नंबर पर सपा में भी कतार है।
विधानसभा का चुनाव जिले में अपनी चरम गति पर धीरे-धीरे पहुंच रहा है। इसी बीच बहराइच विधान परिषद चुनाव की भी अधिसूचना जारी कर दी गई है। बहराइच विधान परिषद क्षेत्र में श्रावस्ती के दोनों विधानसभा क्षेत्र आते हैं। यदि वोटरों के दृष्टिकोण से देखा जाए तो जिले में 983 वोटर विधानपरिषद चुनाव में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करेंगे। इस चुनाव में अपना भाग्य आजमाने के लिए प्रत्याशियों के बीच भाजपा व सपा का टिकट लेने की होड़ मची हुई है। सबसे लंबी कतार भाजपा के पास है। इसमें से कुछ लोगों ने तो बहराइच के साथ-साथ श्रावस्ती के भाजपा संगठन को भी अपना आवेदन पत्र दिया है।
आवेदन करने वाले सभी लोग यही चाहते हैं कि श्रावस्ती का संगठन उनके अकेले नाम को प्रस्तावित करे। ताकि उनकी दवेदारी मजबूत हो सके। लेकिन इसमें दावा प्रस्तुत करने वाला कोई भी व्यक्ति श्रावस्ती जिले का स्थानीय निवासी नहीं है। यही नहीं यदि भाजपा के दो दावेदारों को छोड़ दिया जाए तो किसी अन्य का कोई भी सरोकार श्रावस्ती से कभी नहीं रहा है। यदि भाजपा के दावेदारों में देखा जाए तो प्रमुख नाम सुभाष सत्या व एसबी सिंह का ही आता है। सुभाष सत्या मूल रूप से व्यवसायी के साथ राजनीतिज्ञ हैं। इनका व इनके परिवार से श्रावस्ती से पुराना संबंध रहा है। यह स्वयं हरिहरपुररानी विकास खंड के ब्लॉक प्रमुख रहे हैं। इसके बाद इनकी पत्नी मधु सत्या इस ब्लॉक की प्रमुख रह चुकी हैं। वर्ष 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में सुभाष सत्या स्वयं श्रावस्ती विधानसभा क्षेत्र से बसपा के प्रत्याशी थे। इस दौरान उन्हें करीब 54 हजार वोट मिले थे।
इनके साथ ही एसबी सिंह की दावेदारी भी प्रमुख मानी जा रही है। एसबी सिंह का भी श्रावस्ती से एक लंबा नाता रहा है। वह एक व्यवसायी व सामाजिक सरोकार के तहत श्रावस्ती से जुड़े रहे हैं। वहीं सपा में भी एमएलसी बनने वालों की लंबी कतार है। जिसमें प्रमुख नाम गोंडा के अमर यादव का लिया जा रहा है। जो पहली बार गोंडा छोड़कर श्रावस्ती विधानसभा क्षेत्र से सपा का टिकट मांग रहे थे। लेकिन विधानसभा का टिकट न मिलने पर उनकी दवेदारी एमएलसी पद के लिए हो गई। फिलहाल पार्टी का जब तक टिकट घोषित नहीं होता। सभी दावेदारों की दावेदारी बरकरार है।