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मेघ हुए मेहरबान तो पानी-पानी हुई तराई

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श्रावस्ती के तुलसीपुर क्षेत्र में खेतों में जलभराव - फोटो : SRAWASTI
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श्रावस्ती। तराई में माघ के मेघ रविवार रात मेहरबान रहे। रात गरज चमक के साथ शुरू हुई झमाझम बरसात रुक-रुक कर भोर तक जारी रही। इससे खेत व खलिहान पानी से सराबोर हो गए। जिसे देख किसानों के चेहरे खिल उठे। अपेक्षा से अधिक हुई इस बरसात ने फसलों में टानिक घोल दिया। वहीं जगह-जगह कीचड़ व जलभराव की समस्या उत्पन्न हो जाने से लोगों की परेशानी बढ़ी है। वहीं दिन में छाई बदरी व बीच-बीच में हो रही बूंदाबांदी से मौसम ठंडा बना हुआ है।
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जिले में कई दिनों से आसमान पर छाए बादल बूंदाबांदी कर लौट रहे थे। जिसे देख किसानों में अपेक्षित बरसात की संभावना बढ़ गई थी। ऐसे में रविवार रात गरज चमक के साथ शुरू हुई झमाझम बरसात रुक-रुक कर भोर तक जारी रही। बादलों की गर्जना व बिजली की चमक देख किसान ओलावृष्टि की संभावनाओं को लेकर पूरी रात आशंकित रहे। बरसात थमने के बाद किसानों ने राहत की सांस ली। वहीं सुबह खेतों को पानी से सराबोर देख किसानों के चेहरे खिल उठे। रविवार रात हुई इस बरसात के बाद असिंचित सिरसिया क्षेत्र के खेतों सहित राप्ती के कछार व दोआब क्षेत्र में खेत व खलिहान पानी-पानी हो गए। जनवरी में हुई यह बरसात गेहूं व गन्ना के लिए जहां रामबाण मानी जा रही है। वहीं अलसी, मसूर, अरहर, सरसों, चना व मटर सहित अन्य फसलों के लिए वरदान साबित होगी। हालांकि जिन किसानों के खेतों में लगी सरसों पक चुकी है अथवा किसानों ने उसे काट लिया है। उन फसलों के लिए यह पानी नुकसान देय साबित होगा। इतना ही नहीं खेतों में लगी आलू की फसल में भी गलका रोग का खतरा बढ़ा है। जिसे लेकर किसानों के चेहरे पर बल पड़ रहा है।
बरसात बाद बढ़ी लोगों की दुश्वारी
तराई में रविवार रात हुई इस बरसात के बाद भिनगा व इकौना नगर सहित जिले के अन्य प्रमुख कस्बों, बाजारों व गांवों में कीचड़ व जलभराव की समस्या उत्पन्न हो गई है। जिससे लोगों की दुश्वारियां भी बढ़ी हैं। वहीं निर्माणाधीन भिनगा लक्ष्मनपुर मार्ग पर कीचड़ व फिसलन की समस्या बढ़ जाने के कारण राहगीरों, साइकिल व मोटरसाइकिल सवारों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। यही स्थिति फोरलेन व बौद्ध परिपथ सहित अन्य प्रमुख मार्गों का भी है। जिन पर कीचड़ व फिसलन की समस्या उत्पन्न हो जाने के कारण लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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बढ़ी ठंड लेकिन ठिठुरन से मिली राहत
नेपाल के पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी के कारण विगत कई दिनों से जिले में ठिठुरन बढ़ गई थी। इसके चलते लोगों का घरों से बाहर निकलना दूभर था। लगातार चल रही बर्फीली हवा के कारण दिन में निकलने वाली धूप में भी लोग ठिठुरन के कारण अलाव का सहारा लेने को विवश थे। ऐसे में रविवार रात हुई इस बरसात ने लोगों को ठिठुरन से राहत दिला ली। आसमान पर बादल छाए होने व लगातार चल रही हवा के कारण ठंड तो बढ़ी है। लेकिन ठिठुरन न होने के कारण लोग राहत महसूस कर रहे हैं।
गेहूं में करें यूरिया का छिड़काव
रविवार रात जिले में हुई बरसात गेहूं के लिए बेहद फायदेमंद है। जिन किसानों ने अब तक गेहूं में यूरिया का पहला छिड़काव नहीं किया है। उनके लिए यह उपयुक्त समय है। किसान तत्काल यूरिया का छिड़काव कर दें। बरसात से फूल वाली फसल जैसे सरसों, अलसी व मसूर को आंशिक नुकसान हो सकता है। लेकिन किसानों को घबराने की कोई जरूरत नहीं है। यदि ऐसे ही बदली छाई रही तो सरसों में माहू का खतरा हो सकता है। इससे बचाव के लिए किसान एजडिरेक्टीन 0.15 प्रतिशत ईसी की 25 लीटर मात्रा की दवा को 500 से 600 लीटर पानी में घोल बना कर छिड़काव करें। -डॉ. अवधेश कुमार यादव, जिला कृषि अघिकारी
नुकसान की 72 घंटे में दें सूचना
जिले में बरसात व ओलावृष्टि से खेत में लगी आलू, सरसों, राई, तोरिया, मसूर तथा अन्य दलहनी फसल को नुकसान हो सकता है। आगामी दो दिनों में इसकी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। ऐसे में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से आच्छादित किसान फसलों के नुकसान की भरपाई के लिए 72 घंटें के अंदर टोल फ्री नंबर 18008896868 अथवा मोबाइल नंबर 9414463825, 6387112104,8318297099 या फिर 8423756964 पर फोन कर सूचना दे सकते हैं।
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