गंध कुटी में प्रार्थना करते बौद्ध अनुयायी।- संवाद
कटरा। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती शनिवार को थाईलैंड से आए अनुयायियों के 60 सदस्यीय दल से गुलजार रही। सभी ने बौद्ध भिक्षु देवानंद के नेतृत्व में पारंपरिक ढंग से गंधकुटी व बोधिवृक्ष का दर्शन-पूजन किया। इस दौरान बौद्ध सभा का भी आयोजन किया गया।
बौद्ध सभा को संबोधित करते हुए भिक्षु देवानंद ने कहा कि दुख का निवारण चार आर्य सत्यों को जान लेने से संभव हो जाता है। ये सत्य संसार में दुख का अस्तित्व, दुख का कारण, दुख का निवारण और दुख दूर करने का मध्यम मार्ग हैं। भगवान बुद्ध ने माध्यमिक मार्ग को बौद्ध दर्शन की दूसरी महत्वपूर्ण शिक्षा बताया था।
आगे कहा कि माध्यमिक मार्ग का अर्थ है- किसी भी वस्तु, गुण या प्रवृत्ति का न तो आधिक्य हो और न ही कमी या अभाव। सब कुछ संतुलित अनुपात में होना चाहिए, जिसे आचरण का माध्यमिक मार्ग या सम्यक कहा गया है।
उन्होंने कहा कि अध्यात्म मनुष्य का दुख दूर नहीं करता, बल्कि यह जानकारी देता है कि संसार में हर वस्तु परिवर्तनशील है। इसलिए दुख की अवस्था भी अवश्य बीतती है और सुख आता है। सभा के बाद सभी अनुयायियों ने तपोस्थली का भ्रमण कर उसके इतिहास की जानकारी ली।