तपोस्थली में शनिवार को पूजा करते श्रीलंका व बर्मा के अनुयायी।- संवाद
कटरा। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती शनिवार को श्रीलंका व बर्मा से आए अनुयायियों के 60 सदस्यीय दल से गुलजार रही। सभी अनुयायियों ने बौद्ध भिक्षु माता सुमेधा महाथेरो के नेतृत्व में गंधकुटी पर पारंपरिक अंदाज में पूजा-अर्चना की। इस दौरान बौद्ध सभा का भी आयोजन किया गया।
बौद्ध सभा को संबोधित करते हुए भिक्षु माता सुमेधा ने कहा कि मनुष्य को अपने क्रोध पर नियंत्रण रखना चाहिए, क्रोध ही सभी प्रकार के दुखों का कारण होता है। मनुष्य को ध्यान व बुद्ध के ज्ञान को माध्यम बनाकर क्रोध पर विजय हासिल करनी चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि मनुष्य का दूसरा सबसे बड़ा शत्रु लोभ होता है। भगवान बुद्ध ने विलासितापूर्ण जीवन शैली को त्यागकर संन्यासी बनना उचित समझा। वह दुखों का कारण व निवारण तलाशना चाहते थे। बुद्ध के उपदेश में लोभ से दूर रहने की सीख दी गई है।
सभा के बाद सभी अनुयायियों ने कौशांबी कुटी, सूर्यकुंड, सभा मंडप, गंध कुटी, राहुल कुटी, संघा बुद्ध विहार, कच्ची कुटी-पक्की कुटी आदि का भ्रमण कर उनके इतिहास की जानकारी ली।