गंधकुटी में प्रार्थना करते बौद्ध अनुयायी।
कटरा। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती शुक्रवार को थाईलैंड से आए अनुयायियों के 30 सदस्यीय दल से गुलजार रही। सभी अनुयायियों ने भिक्षु भंवरानंद के नेतृत्व में गंधकुटी में दर्शन-पूजन किया। इस दौरान बौद्ध सभा का भी आयोजन किया गया।
बौद्ध सभा को संबोधित करते हुए भिक्षु ने कहा कि अध्यात्म मनुष्य के दुख को दूर नहीं करता है। यह केवल संसार की परिवर्तनशीलता की जानकारी देता है। दुख की अवस्था भी अवश्य बीतती है और सुख आता है। दुख का निवारण चार सत्यों को जान लेने से संभव है। ये सत्य हैं, संसार में दुख का अस्तित्व, दुख का कारण, दुख के कारण को दूर करने की संभावना, और दुख दूर करने का मध्यम मार्ग। मध्यम मार्ग बौद्ध दर्शन की दूसरी शिक्षा है। माध्यमिक मार्ग का अर्थ है, किसी भी वस्तु, गुण या प्रवृत्ति का न तो आधिक्य हो और न ही कमी हो। सब कुछ संतुलित अनुपात में होना चाहिए। इस संतुलन की अवस्था को आचरण का माध्यमिक मार्ग कहा गया है।